विशेषज्ञ की चेतावनीः US की तूफान से पहले शांति खतरनाक, ईरान पर फिर हो सकता बड़ा अटैक

Edited By Updated: 27 Apr, 2026 06:43 PM

us iran talks without progress may indicate possibility of another attack

विदेश नीति विशेषज्ञ रोबिंदर सचदेव (Robinder Sachdev) ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान-अमेरिका वार्ता बेनतीजा रही, तो बड़ा हमला हो सकता है। अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) की कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं, लेकिन तनाव कम नहीं हुआ।

International Desk: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। विदेश मामलों के विशेषज्ञ रोबिंदर सचदेव (Robinder Sachdev) का कहना है कि अगर ये बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के लंबी चलती रही, तो आने वाले दिनों में ईरान पर बड़ा सैन्य हमला हो सकता है। उन्होंने इसे “तूफान से पहले की शांति” जैसी स्थिति बताया है। सचदेव के अनुसार, फिलहाल बातचीत किसी ठोस दिशा में नहीं बढ़ रही और ऐसा लग रहा है कि दोनों पक्ष एक ही जगह पर अटके हुए हैं। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका को लगे कि बातचीत बेकार जा रही है, तो वह सख्त कदम उठा सकता है यानि वो फिर ईरान पर बड़ा अटैक कर सकता है।

 

खासकर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) जैसे नेता भी अमेरिका पर सैन्य कार्रवाई का दबाव बना सकते हैं। इस बीच ईरान कूटनीतिक स्तर पर काफी सक्रिय है। अब्बास अराघची  (Abbas Araghchi) लगातार अलग-अलग देशों का दौरा कर रहे हैं। वह पहले पाकिस्तान, फिर ओमान और अब Russia पहुंचे हैं। इसे “शटल डिप्लोमेसी” कहा जा रहा है, जिसका मकसद अपने सहयोगियों को साथ लाना और रणनीतिक समर्थन हासिल करना है। सचदेव ने कहा कि रूस की भूमिका इस पूरे मामले में अहम हो सकती है। पहले भी परमाणु समझौते के दौरान रूस ने ईरान की मदद की थी और यूरेनियम को अपने यहां ले गया था। अब फिर से रूस ईरान को तकनीकी या सैन्य समर्थन दे सकता है, जिससे हालात और जटिल हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि डोनाल्ड ट्रम्प इस पूरे मामले में एक “ट्रॉफी” चाहते हैं, यानी ईरान का संवर्धित (enriched) यूरेनियम।

 

अगर अमेरिका इसे हासिल कर लेता है, तो वह इसे अपनी बड़ी जीत के रूप में पेश कर सकता है। लेकिन ईरान इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं है, क्योंकि वह इसे आत्मसमर्पण के रूप में देखता है। वर्तमान बातचीत में सबसे बड़ा मुद्दा होर्मुज बना हुआ है। ईरान का कहना है कि पहले इस समुद्री रास्ते को खोला जाए और अमेरिका अपनी नाकेबंदी हटाए। इसके बाद ही आगे की बातचीत संभव है। इससे वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई फिर से सामान्य हो सकती है। इसके अलावा, ईरान अपने मिसाइल कार्यक्रम और युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई (reparations) की मांग भी कर रहा है। ये सभी मुद्दे बातचीत को और मुश्किल बना रहे हैं। कुल मिलाकर, हालात बेहद नाजुक हैं। एक तरफ बातचीत जारी है, लेकिन दूसरी तरफ युद्ध का खतरा भी बना हुआ है। अगर जल्द कोई समाधान नहीं निकला, तो यह संकट और गंभीर रूप ले सकता है।
 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!