'चंदा लो, धंधा दो' नीति से Private Investment ठप: कांग्रेस का मोदी सरकार पर बड़ा प्रहार, जयराम रमेश ने गिनाए मंदी के कारण

Edited By Updated: 05 May, 2026 11:29 AM

jairam ramesh surrounded the modi government

कांग्रेस ने मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन के एक बयान का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सरकार की 'चंदा लो, धंधा दो' वाली नीति से निजी निवेश में सुस्ती है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक खबर का उल्लेख किया जिसके मुताबिक नागेश्वरन ने कहा है कि...

नेशनल डेस्क। कांग्रेस ने मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन के एक बयान का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सरकार की 'चंदा लो, धंधा दो' वाली नीति से निजी निवेश में सुस्ती है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने एक खबर का उल्लेख किया जिसके मुताबिक नागेश्वरन ने कहा है कि कोविड महामारी के बाद देश की 500 शीर्ष कंपनियों का मुनाफा 30 प्रतिशत से अधिक बढ़ा लेकिन उनके स्तर पर निवेश नहीं हुआ। 

रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया, पिछले कुछ समय से कांग्रेस अर्थव्यवस्था को उच्च वास्तविक जीडीपी विकास दर हासिल करने से रोकने वाली एक मूलभूत समस्या की ओर ध्यान आकर्षित कर रही है। वह यह है कि निजी कॉर्पोरेट निवेश में सुस्ती है। उन्होंने कहा, कर दरों में कटौती की गई है और व्यापार की सुगमता में कथित तौर पर काफी सुधार हुआ है। लेकिन इन कदमों का अपेक्षित परिणाम नहीं मिला यानी निजी निवेश में वृद्धि नहीं हुई।

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उनके मुताबिक, अब वित्त मंत्रालय के विद्वान मुख्य आर्थिक सलाहकार ने यह कहकर कांग्रेस के इस तर्क को अपना समर्थन दिया है कि कोविड के बाद भारत की सबसे बड़ी कंपनियों ने अपने कॉर्पोरेट मुनाफे में प्रति वर्ष 30.8 प्रतिशत की वृद्धि देखी, जबकि उनके द्वारा निवेश नहीं किया गया। रमेश का कहना है, निवेश करने से इनकार करना स्वयं कई कारकों से प्रेरित है। 

भारत में स्थिर वास्तविक वेतन संकट के कारण धीमी उपभोक्ता मांग वृद्धि है। उपभोक्ता मांग के अभाव में भारतीय उद्योग जगत को निवेश के लिए कोई प्रोत्साहन नहीं मिल रह। उन्होंने दावा किया कि ईडी, सीबीआई और आयकर के रेड (छापा) राज ने निवेशकों के बीच व्यापारिक अनिश्चितता और व्यापक भय का माहौल पैदा कर दिया है। 

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कांग्रेस नेता ने कहा, अर्थव्यवस्था के निवेश-प्रधान क्षेत्रों पर बढ़ता नियंत्रण भी एक कारक है जिसे मोदी सरकार ने सुविधाजनक और प्रोत्साहित किया है। उन्होंने कहा, मोदानी इस भाईचारे का ज्वलंत उदाहरण हैं। 

रमेश ने कहा कि ऐसी स्थिति में कॉरपोरेट समूहों के लिए स्वतंत्र रूप से निवेश करने और इसके साथ आने वाले जोखिम को स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहन बहुत कम है जबकि मोदी सरकार के 'चंदा लो, धंधा दो' वाले बिजनेस काउंटर पर भुगतान करके सफलतापूर्वक मुनाफा कमाया जा सकता है।

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