बुल्गारिया में जयशंकर का दुनिया को शांति का संदेशः, कहा- 'यह युद्ध का युग नहीं, आतंकवाद पर भारत का स्पष्ट दृष्टिकोण'

Edited By Updated: 11 Jun, 2026 04:13 PM

jaishankar s strong message amid west asia conflict not an era of war

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुल्गारिया में कहा कि मौजूदा वैश्विक संघर्षों का समाधान युद्ध नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की वकालत की और ऊर्जा, खाद्य तथा उर्वरक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर ग्लोबल साउथ की चिंताओं...

International Desk: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों के बीच ''संवाद और कूटनीति'' को ही एकमात्र समाधान बताया और भारत के इस रुख को दोहराया कि ''यह युद्ध का युग नहीं है।'' जयशंकर ने बुधवार को अपनी बुल्गारियाई समकक्ष वेलिस्लावा पेट्रोवा-चमोवा के साथ बैठक के बाद यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा ''दुनिया इस समय अत्यंत अस्थिर और अनिश्चित दौर से गुजर रही है। कई बड़े संघर्ष जारी हैं, आर्थिक सुरक्षा को लेकर चिंताएं हैं, महामारी का हालिया अनुभव है और आतंकवाद का खतरा बार-बार सामने आ रहा है।'' जयशंकर ने कहा, ''इन सभी मुद्दों पर भारत का स्पष्ट दृष्टिकोण है। हमारा मानना है कि यह युद्ध का युग नहीं है। इन संघर्षों का एकमात्र समाधान संवाद और कूटनीति है।''

 

उन्होंने कहा कि 'ग्लोबल साउथ' की आवाज के रूप में भारत ने ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को लगातार उठाया है। 'ग्लोबल साउथ' शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है। विदेश मंत्री ने कहा, ''जहां तक आर्थिक जोखिमों का सवाल है, उसका समाधान आपूर्ति शृंखला की मजबूती तथा उसके और अधिक विविधीकरण में है। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है कि समुद्री व्यापार न तो बाधित हो और न ही खतरे में पड़े। ग्लोबल साउथ की ओर से भारत ने ऊर्जा, खाद्य और उर्वरकों से जुड़ी चिंताओं को बार-बार रेखांकित किया है।''

 

जयशंकर ने कहा, ''...कोविड काल ने गहरे अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता को भी प्रदर्शित किया।'' आतंकवाद के मुद्दे पर जयशंकर ने कहा, ''आतंकवाद के मामले में दुनिया को शून्य सहिष्णुता का स्पष्ट संदेश देना चाहिए। इन सभी मुद्दों पर भारत और बुल्गारिया के विचारों में समानता रही।'' जयशंकर 10-11 जून को बुल्गारिया और फिनलैंड की दो देशों की यात्रा पर हैं। इस यात्रा का उद्देश्य यूरोपीय साझेदारों के साथ भारत की भागीदारी को आगे बढ़ाना और विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना है।  

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