Edited By Radhika,Updated: 02 Jan, 2026 01:32 PM

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार और चुनाव आयोग के बीच एक सर्वेक्षण रिपोर्ट का खुलासा हो गया है। राज्य चुनाव आयोग द्वारा जारी एक सर्वे रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रदेश की 83.61% जनता ने EVM और चुनावी प्रक्रिया पर अटूट भरोसा जताया है। इस रिपोर्ट के...
नेशनल डेस्क : कर्नाटक की कांग्रेस सरकार और चुनाव आयोग के बीच एक सर्वेक्षण रिपोर्ट का खुलासा हो गया है। राज्य चुनाव आयोग द्वारा जारी एक सर्वे रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रदेश की 83.61% जनता ने EVM और चुनावी प्रक्रिया पर अटूट भरोसा जताया है। इस रिपोर्ट के सामने आते ही कांग्रेस बैकफुट पर है, जबकि पार्टी के दिग्गज नेता और मंत्री प्रियंक खरगे ने इस सर्वे की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
इन नतीजों से असहज हुई कांग्रेस
'लोकसभा चुनाव 2024: नागरिकों के ज्ञान, दृष्टिकोण और व्यवहार का मूल्यांकन' (KAP) नामक इस सर्वे के नतीजे कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के दावों से बिल्कुल उलट हैं:
- EVM पर भरोसा: 83.61% लोगों ने चुनाव प्रक्रिया और वोटिंग मशीन को विश्वसनीय बताया।
- वोट की कीमत: 81.39% उत्तरदाताओं ने माना कि उनका हर एक वोट महत्वपूर्ण है।
- ग्रामीण बनाम शहरी: सर्वे के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में लोग चुनाव को निष्पक्ष मानते हैं, जबकि शहरी युवाओं में पारदर्शिता को लेकर कुछ उदासीनता देखी गई।
- कलबुर्गी: मल्लिकार्जुन खरगे के गृह क्षेत्र कलबुर्गी में भी चुनावी निष्पक्षता पर जनता ने भरोसा जताया है, हालांकि वहां धनबल के प्रभाव की चिंता भी जताई गई।

नतीजों पर खरगे ने जताई आपत्ति
मंत्री प्रियंक खरगे ने शुक्रवार को इस सर्वे पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह राज्य सरकार द्वारा अधिकृत नहीं था। खरगे के अनुसार जिस संस्था (GRAAM) ने यह सर्वे किया, उसका झुकाव एक खास विचारधारा और PMO की ओर है। उन्होंने 100 से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में केवल 5,000 लोगों के सैंपल साइज को नाकाफी बताया। खरगे ने राहुल गांधी के पुराने बयानों को दोहराते हुए कहा कि चुनाव आयोग और भाजपा ने मिलकर 2023 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले बड़े पैमाने पर वोट काटे थे।

कैसे हुआ यह सर्वे?
यह सर्वेक्षण मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबुकुमार की देखरेख में 'ग्रासरूट्स रिसर्च एंड एडवोकेसी मूवमेंट' (GRAAM) द्वारा किया गया था। इसमें कर्नाटक के 102 विधानसभा क्षेत्रों के 5,100 लोगों से राय ली गई। अध्ययन का उद्देश्य यह समझना था कि चुनावी साक्षरता और जागरूकता का स्तर जनता में कैसा है।