केरल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बच्चे के प्राइवेट पार्ट को चूमना 'पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट'- 20 साल की सजा बरकरार

Edited By Updated: 03 Sep, 2026 10:32 AM

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केरल: केरल हाईकोर्ट ने नाबालिग बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों (POCSO Act) को लेकर एक बेहद अहम और सख्त कानूनी दलील दी है। हाईकोर्ट ने साफ किया है कि यदि कोई व्यक्ति यौन मंशा के साथ किसी बच्चे के प्राइवेट पार्ट को अपने छूता या चूमता है, तो उसे पॉक्सो...

केरल: केरल हाईकोर्ट ने नाबालिग बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों (POCSO Act) को लेकर एक बेहद अहम और सख्त कानूनी दलील दी है। हाईकोर्ट ने साफ किया है कि यदि कोई व्यक्ति यौन मंशा के साथ किसी बच्चे के प्राइवेट पार्ट को अपने छूता या चूमता है, तो उसे पॉक्सो कानून के तहत 'पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट' (Penetrative Sexual Assault) माना जाएगा और यह सेक्शन 3(d) के तहत अपराध माना जाएगा।
 
दरअसल, जस्टिस ए. बदरुद्दीन की सिंगल बेंच ने कहा कि PW1 के बयान (कि आरोपी ने दो बार उसके लिंग पर किस किया) और POCSO एक्ट के सेक्शन 3(d) में लिखी बातों को देखने पर यह साफ़ है कि बच्चे के लिंग, योनि, गुदा या मूत्रमार्ग पर आरोपी का मुंह लगाना ही POCSO एक्ट के सेक्शन 3(d) के तहत अपराध साबित करने के लिए काफ़ी है। यानी, इस खास क्लॉज़ के लिए कानून में ओरल सेक्स की ज़रूरत नहीं है, जब यौन इरादे से मुंह लिंग को छूता है, तो उस हरकत को सेक्शन 3(d) के तहत 'पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट' माना जाएगा, जिसके लिए POCSO एक्ट के सेक्शन 4 के तहत सज़ा हो सकती है। 

क्या है मामला?
बता दें कि यह मामला केरल के पथनामथिट्टा जिले का है, जहां एक 61 वर्षीय व्यक्ति ने अपनी दुकान में 14 साल के एक नाबालिग लड़के को फुसलाकर बुलाया। आरोप के अनुसार, आरोपी ने नाबालिग को शराब पिलाई और गांजे की बीड़ी पीने को दी। इसके बाद आरोपी ने पीड़ित के कपड़े उतारकर उसके प्राइवेट पार्ट के साथ छेड़छाड़ की और गंभीर यौन शोषण के इस कृत्य को दो बार दोहराया।

 इसी आधार पर, अभियोजन पक्ष ने आरोपी पर POCSO एक्ट की धारा 4 के साथ धारा 3(d), 7, 8, 6, 5(l), भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377, और जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) एक्ट, 2015 (JJ एक्ट) की धारा 77 के तहत अपराध करने का आरोप लगाया। 

ट्रायल कोर्ट (विशेष पॉक्सो अदालत) ने आरोपी को धारा 6 के साथ धारा 5(l) (बार-बार गंभीर यौन शोषण) और धारा 10 (गंभीर यौन हमला) के तहत दोषी ठहराते हुए 20 साल की कड़ी कैद की सजा सुनाई थी।

वहीं, आरोपी की ओर से दलील दी गई थी कि मामले में गहरा पैठ (deeper penetration) या ओरल सेक्स नहीं हुआ था, इसलिए इसे पेनिट्रेटिव असॉल्ट की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

लेकिन इस पर बेंच ने बताया कि सेक्शन 5(l) के तहत, अगर कोई व्यक्ति किसी बच्चे के साथ एक से ज़्यादा बार या बार-बार पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट (penetrative sexual assault) करता है, तो उसे सेक्शन 6 के तहत सज़ा दी जाएगी। इसमें कम से कम 20 साल की जेल की सज़ा का प्रावधान है, जिसे बढ़ाकर उम्रकैद भी किया जा सकता है। इस तरह, आरोपी को सुनाई गई सज़ा को बरकरार रखते हुए बेंच ने अपील खारिज कर दी।  

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