LIC के लिए खतरे की घंटी, ग्राहकों का भरोसा घटा... 5 साल बाद छोड़ रहे हैं पॉलिसी, आंकड़ों ने चौंकाया

Edited By Updated: 09 Jul, 2026 10:11 AM

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Life Insurance/Policy: देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी Life Insurance Corporation of India (LIC) के लिए ग्राहकों को लंबे समय तक जोड़े रखना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। कंपनी के वित्तीय आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि पिछले कुछ वर्षों में...

Life Insurance/Policy: देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी Life Insurance Corporation of India (LIC) के लिए ग्राहकों को लंबे समय तक जोड़े रखना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। कंपनी के वित्तीय आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि पिछले कुछ वर्षों में उसकी 5-year policy persistency ratio लगातार कमजोर हुई है। Policy persistency ratio यह बताता है कि कितने ग्राहक अपनी बीमा पॉलिसी को तय अवधि तक जारी रखते हैं। लाइफ इंश्योरेंस में 61वें महीने (लगभग  5 साल बाद) का persistency ratio ग्राहक की लंबे समय तक जुड़े रहने की स्थिति को समझने का अहम पैमाना माना जाता है।

5 साल बाद आधे से भी कम ग्राहक रह गए सक्रिय
LIC की individual policies की संख्या के आधार पर 61वें महीने की persistency FY22 में करीब 50% थी, जो घटकर FY26 में 46.88% रह गई। इसका मतलब है कि 100 ग्राहकों में से करीब 47 ग्राहक ही पांचवें साल तक अपनी पॉलिसी जारी रख पाए। Premium amount के आधार पर भी गिरावट देखने को मिली। Individual regular premium policies में 61वें महीने का persistency ratio FY25 में 63% से अधिक था, जो FY26 में घटकर 59.31% रह गया। यानी प्रीमियम के लिहाज से करीब 60% ग्राहक ही पांच साल बाद भी भुगतान जारी रख रहे हैं।

 LIC के आंकड़ों में एक Positive पहलू भी सामने आया है। Individual policies के लिए 13वें महीने का persistency ratio FY21 के 60% से ऊपर के स्तर से बढ़कर FY26 में 64.87% हो गया। यानि पहले साल के बाद ज्यादा ग्राहक अपनी पॉलिसी बनाए रख रहे हैं। लेकिन पांच साल की अवधि में गिरावट यह संकेत देती है कि लंबे समय तक ग्राहकों को बनाए रखना अभी भी बड़ी चुनौती है।

LIC ने माना, persistency सुधारना प्राथमिकता
LIC ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि वह policy lapse यानी पॉलिसी बंद होने की समस्या को कम करने के लिए कई कदम उठा रही है। इनमें ग्राहकों से बेहतर संपर्क, loyalty programs और बीमा सुरक्षा बनाए रखने के महत्व को लेकर जागरूकता अभियान शामिल हैं। कंपनी ने कहा कि persistency को अब सभी स्तरों पर Key Performance Indicators (KPIs) और performance-based incentives से जोड़ा गया है, ताकि कर्मचारियों का ध्यान ग्राहकों को लंबे समय तक बनाए रखने पर रहे।

Product mix में बदलाव से पड़ा असर
LIC के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO R. Doraiswamy ने कंपनी की earnings call में बताया कि पांच साल की persistency में कमी का एक कारण product mix में बदलाव भी है। उन्होंने कहा कि कंपनी ने ज्यादा premium वाली policies पर फोकस बढ़ाया है और कोविड अवधि के दौरान बेचे गए कुछ insurance products अब उपलब्ध नहीं हैं। इन बदलावों का असर 61वें महीने के persistency आंकड़ों पर पड़ा है।

नई पॉलिसियों की तुलना में बंद होने वाली पॉलिसियों का दबाव
LIC की active individual policies की संख्या में भी पिछले कुछ वर्षों में खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। आंकड़ों के अनुसार, FY21 में करीब 28 करोड़ active individual policies थीं, जो FY26 के अंत तक घटकर लगभग 25.4 करोड़ रह गईं। यह संकेत देता है कि कुछ क्षेत्रों में नई पॉलिसियां जुड़ने की रफ्तार, पुरानी पॉलिसियों के बंद होने की गति से कम रही।

Non-Participating plans पर बढ़ता फोकस
इंश्योरेंस इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का मानना है कि LIC का Non-Participating Products पर बढ़ता ध्यान भी customer retention को प्रभावित कर सकता है। FY26 में LIC का कुल Annual Premium Equivalent (APE) करीब ₹66,961 करोड़ रहा। इसमें individual non-participating products का APE 44% बढ़कर ₹15,214 करोड़ पहुंच गया। Non-participating policies में कंपनियों को policyholders के साथ बोनस बांटना नहीं पड़ता, इसलिए इनमें आमतौर पर ज्यादा margins मिलते हैं। हालांकि कुछ योजनाओं, खासकर ULIPs (Unit Linked Insurance Plans) में ग्राहक का व्यवहार बाजार की स्थिति और निवेश रिटर्न से अधिक प्रभावित हो सकता है।

LIC के सामने बड़ी चुनौती
LIC के लिए अब चुनौती सिर्फ नई पॉलिसियां बेचने की नहीं, बल्कि ग्राहकों को लंबे समय तक बनाए रखने की है। Life insurance policies आमतौर पर 20-30 साल तक चलती हैं, इसलिए पांच साल बाद भी ग्राहकों की निरंतरता कंपनी की भविष्य की growth और profitability के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। 

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