Edited By SHUKDEV PRASAD,Updated: 11 Mar, 2026 09:47 PM

पश्चिम बंगाल में एलपीजी सिलेंडर की कमी और कीमतों में तेजी के बीच राज्य सरकार सक्रिय हो गई है। बुधवार को मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने तेल कंपनियों, एलपीजी डीलरों और संबंधित अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की।
नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल में एलपीजी सिलेंडर की कमी और कीमतों में तेजी के बीच राज्य सरकार सक्रिय हो गई है। बुधवार को मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने तेल कंपनियों, एलपीजी डीलरों और संबंधित अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में राज्य में उपलब्ध गैस स्टॉक को प्राथमिकता के आधार पर स्थानीय जरूरतों के लिए सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने डीलरों और रिफाइनरी से अपील की कि फिलहाल राज्य के एलपीजी स्टॉक को दूसरे राज्यों में भेजने से बचा जाए, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ अस्पताल, स्कूलों के मिड-डे मील और आंगनबाड़ी केंद्रों जैसी जरूरी सेवाओं की सप्लाई प्रभावित न हो।
वैश्विक हालात से बढ़ा दबाव
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव—विशेष रूप से Strait of Hormuz के आसपास—का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है। उनके मुताबिक इस स्थिति के कारण कमर्शियल एलपीजी की उपलब्धता प्रभावित हो रही है और इसका असर धीरे-धीरे घरेलू गैस सप्लाई पर भी पड़ सकता है।
जरूरी सेवाओं को प्राथमिकता
बैठक के दौरान यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि गैस की सप्लाई सबसे पहले आवश्यक सेवाओं तक पहुंचे। इसमें अस्पताल, स्कूलों में मिड-डे मील योजना, आईसीडीएस केंद्र और छात्रावास शामिल हैं। सरकार का कहना है कि यदि गैस की कमी बढ़ती है तो सबसे अधिक असर आम परिवारों और छोटे कारोबार—जैसे ढाबे या छोटे रेस्टोरेंट—पर पड़ सकता है।
बैठक में लिए गए अहम फैसले
बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई और कुछ प्राथमिक निर्देश भी दिए गए। राज्य की रिफाइनरियों से कहा गया कि स्थानीय मांग को प्राथमिकता दें। एलपीजी डीलरों से अपील की गई कि अस्थायी रूप से गैस को राज्य से बाहर न भेजें।अस्पताल, स्कूल और आईसीडीएस केंद्र जैसी जरूरी सेवाओं की सप्लाई जारी रखने का आश्वासन दिया गया। संभावित संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार नई गाइडलाइंस या SOP तैयार करने पर विचार कर रही है।
नबन्ना में फिर होगी समीक्षा बैठक
स्थिति पर नजर बनाए रखने के लिए गुरुवार को Nabanna में एक आपात समीक्षा बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में गैस सप्लाई की मौजूदा स्थिति, संभावित विकल्पों और आम लोगों को राहत देने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।
केंद्र सरकार पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्याप्त गैस स्टॉक और योजना के बिना बुकिंग के बीच 21–25 दिन का अंतर लागू कर दिया गया, जिससे उपभोक्ताओं में घबराहट बढ़ी और कालाबाजारी की आशंका भी पैदा हुई।
उन्होंने कहा कि एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित करना केंद्र सरकार और Ministry of Petroleum and Natural Gas की जिम्मेदारी है, इसलिए इस मुद्दे पर स्पष्ट रणनीति सामने आनी चाहिए।
वैकल्पिक उपायों पर भी विचार
राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि गैस संकट की स्थिति में वैकल्पिक विकल्पों पर भी काम किया जा सकता है। इसमें इंडक्शन कुकर और अन्य इलेक्ट्रिक कुकिंग विकल्पों को बढ़ावा देने जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं।