Edited By Pardeep,Updated: 01 May, 2026 11:33 PM

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मई महीने के लिए अपना ताजा पूर्वानुमान जारी कर दिया है, जो देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए राहत और चुनौती दोनों लेकर आया है। मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि मई में पूरे...
नेशनल डेस्कः भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मई महीने के लिए अपना ताजा पूर्वानुमान जारी कर दिया है, जो देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए राहत और चुनौती दोनों लेकर आया है। मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि मई में पूरे देश में औसत वर्षा सामान्य से अधिक रहने की संभावना है।
14 से 16 मई के बीच मानसून की दस्तक
मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के संकेत मिलने लगे हैं। अनुमान है कि 14 से 16 मई के बीच मानसून अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पहुंच जाएगा। यह सामान्य तिथि के आसपास है, जिससे इस साल मानसून के समय पर आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है।
पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में लू से राहत
उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों, जिनमें पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश शामिल हैं, वहां के लोगों के लिए अच्छी खबर है। मई में इन राज्यों में अधिकतम तापमान सामान्य या उससे कम रहने का अनुमान है। इससे इस क्षेत्र में भीषण लू (Heatwave) का असर काफी सीमित रहेगा। हालांकि, महीने के अंतिम सप्ताह में तापमान में कुछ वृद्धि देखी जा सकती है।
रात की गर्मी करेगी परेशान, इन राज्यों में 'हीटवेव' का अलर्ट
भले ही दिन में राहत मिले, लेकिन देश के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जिसका मतलब है कि रातें गर्म बनी रह सकती हैं। इसके अलावा, आईएमडी ने गुजरात (विशेषकर सौराष्ट्र), महाराष्ट्र, पूर्वी तटीय राज्यों और हिमालय की तराई वाले इलाकों में सामान्य से अधिक दिनों तक लू चलने की चेतावनी दी है।
कृषि और जल प्रबंधन के लिए चुनौती
मौसम विभाग ने सचेत किया है कि मई में वर्षा का स्वरूप असमान रह सकता है। जहां उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से अधिक बारिश होगी, वहीं पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में वर्षा सामान्य से कम रहने की आशंका है। कुछ इलाकों में अचानक होने वाली भारी बारिश से बाढ़ जैसे हालात भी बन सकते हैं, जो कृषि और जल प्रबंधन के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
अल-नीनो का खतरा बरकरार
मौसम के इस बदलते मिजाज के पीछे समुद्री कारकों की बड़ी भूमिका है। वर्तमान में प्रशांत महासागर में स्थिति न्यूट्रल है, लेकिन यह धीरे-धीरे अल-नीनो की ओर बढ़ रही है। यदि मानसून के दौरान अल-नीनो विकसित होता है, तो यह बारिश को प्रभावित कर उसे कमजोर कर सकता है।