चीन में आवारा कुत्तों पर कसा शिकंजा; समस्या से निपटने के लिए सख्त नियम व व्यवस्था लागू, भारत भी ले सबक

Edited By Updated: 21 Sep, 2026 04:20 PM

minated stray dogs from the roads of its major cities report

चीन के शंघाई और बीजिंग जैसे बड़े शहरों में कुत्ता प्रबंधन के नियम सख्त हैं। शंघाई में आवारा और खोए हुए कुत्तों को पकड़कर आश्रय देने तथा गोद देने की व्यवस्था है। बीजिंग में पंजीकरण, वार्षिक जांच और सार्वजनिक स्थानों पर पट्टा लगाने समेत कई नियम लागू...

Bejing: चीन के बड़े शहरों में आवारा और खुले में घूमने वाले कुत्तों के प्रबंधन को लेकर नियमों का पालन सख्ती से कराया जा रहा है। शंघाई में आवारा,  और लोगों को परेशान करने वाले कुत्तों को पकड़कर आश्रय में रखने तथा उनके मालिकों या नए पालने वालों तक पहुंचाने की बाकायदा व्यवस्था है। शंघाई पुलिस ने इन नियमों की वैधता जुलाई 2026 में बढ़ाकर 15 अगस्त 2031 तक कर दी है। शंघाई की व्यवस्था के तहत पुलिस और संबंधित विभाग आवारा कुत्तों को पकड़ने और उन्हें निर्धारित आश्रय केंद्रों में पहुंचाने का काम करते हैं। आधिकारिक नियमों के अनुसार, जिन कुत्तों को उनके मालिक निर्धारित अवधि में वापस नहीं लेते, उन्हें नियमों के तहत बिना मालिक वाले कुत्तों की श्रेणी में रखा जा सकता है और योग्य लोगों या संस्थाओं को गोद देने की व्यवस्था भी है।

 

शंघाई में पंजीकरण और पट्टा जरूरी
शंघाई में कुत्ता पालने वालों के लिए पंजीकरण और वार्षिक जांच की व्यवस्था है। शहर में पुलिस की ओर से बिना पंजीकरण, बिना वार्षिक जांच और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जाती है। 2025 में शंघाई पुलिस ने कुत्तों से जुड़े 9,000 से अधिक मामलों में कानूनी कार्रवाई की थी। शहर के नियमों में सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को निर्धारित तरीके से नियंत्रित रखना भी शामिल है। बड़े कुत्तों के लिए मुंह पर जाली लगाने और कुत्तों को पट्टे से बांधकर बाहर ले जाने जैसे नियम लागू हैं। आवारा कुत्तों की समस्या वाले इलाकों में उन्हें पकड़कर सुरक्षित रूप से आश्रय देने की व्यवस्था भी की जाती है।

 

बीजिंग में भी कड़े नियम
राजधानी बीजिंग में भी कुत्ता पालने और उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर ले जाने के लिए विस्तृत नियम हैं। आधिकारिक नियमों के मुताबिक कुत्तों का पंजीकरण और वार्षिक जांच जरूरी है। 2026 के लिए वार्षिक जांच की अवधि 1 मई से 31 दिसंबर तक निर्धारित की गई है। बीजिंग में कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों पर ले जाने को लेकर भी प्रतिबंध हैं। प्रमुख सड़कों और कुछ निर्धारित स्थानों पर कुत्तों को घुमाने की मनाही है। बाहर ले जाते समय कुत्ते को पट्टे से बांधना और उसे वयस्क व्यक्ति द्वारा नियंत्रित करना जरूरी है। बड़े और आक्रामक माने जाने वाले कुत्तों के लिए अतिरिक्त प्रतिबंध हैं। इन नियमों का एक उद्देश्य लोगों की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना है, जबकि दूसरी ओर आवारा कुत्तों के मानवीय प्रबंधन का सवाल भी महत्वपूर्ण है। शंघाई के आधिकारिक दिशा-निर्देशों में पकड़े गए कुत्तों के लिए आश्रय, मालिक द्वारा वापस लेने और योग्य लोगों द्वारा गोद लेने की व्यवस्था का उल्लेख है।


 
भारत भी ले सबक
चीन के इन कदमों के बीच भारत में भी आवारा कुत्तों की समस्या पर सवाल उठते रहे हैं। भारत में भी आवारा कुत्तों के आंतक से लोग परेशान हैं। आए दिन कुत्तों के हमलों से लोगों के घायल होने व मरने की खबरें आती रहती हैं लेकिन राज्य या स्थानीय सरकारें लोगों को जान की सुरक्षा और कुत्तों के आंतक से बचने के लिए कोई भी उचित कदम उठाने में विफल साबित हो रही हैं।  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम भी मानता है कि भारत में रेबीज एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है और करीब 96 प्रतिशत रेबीज से होने वाली बीमारी और मौत का संबंध कुत्तों के काटने से है।

 

सरकारी स्वास्थ्य दस्तावेजों के अनुसार, बच्चों को कुत्तों के काटने के मामलों में विशेष रूप से संवेदनशील माना जाता है। केंद्र सरकार ने कुत्तों से फैलने वाली रेबीज से मानव मृत्यु को 2030 तक खत्म करने के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना तो बनाई है लेकिन उनके क्रियान्वन की तरफ कोई ध्यान नहीं दिय जा रहा है।भारत में समस्या केवल आवारा कुत्तों की संख्या तक सीमित नहीं है। कुत्तों के हमलों से लोगों की सुरक्षा, रेबीज की रोकथाम, समय पर टीका और उपचार तथा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण इन सभी पहलुओं को साथ लेकर चलना जरूरी है।
 

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