Edited By SHUKDEV PRASAD,Updated: 25 Mar, 2026 07:45 PM

देश की आर्थिक राजधानी Mumbai की शान माने जाने वाले Mumbai Dabbawala Association इन दिनों गंभीर चुनौतियों से गुजर रहे हैं। अपनी सटीक टाइमिंग और शानदार मैनेजमेंट के लिए दुनियाभर में मशहूर यह टिफिन डिलीवरी सिस्टम अब एलपीजी की कमी के कारण प्रभावित हो...
नेशनल डेस्क: देश की आर्थिक राजधानी Mumbai की शान माने जाने वाले Mumbai Dabbawala Association इन दिनों गंभीर चुनौतियों से गुजर रहे हैं। अपनी सटीक टाइमिंग और शानदार मैनेजमेंट के लिए दुनियाभर में मशहूर यह टिफिन डिलीवरी सिस्टम अब एलपीजी की कमी के कारण प्रभावित हो रहा है।
दुनिया भर में मिसाल, लेकिन अब मुश्किल दौर
मुंबई के डब्बेवाले सिर्फ एक सर्विस नहीं, बल्कि अनुशासन और भरोसे की मिसाल हैं। उनकी कार्यप्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैनेजमेंट स्टडी का हिस्सा बनाया जाता है। यहां तक कि ब्रिटेन के राजा Charles III ने भी अपने दौरे के दौरान डब्बेवालों से मुलाकात कर उनकी कार्यशैली की सराहना की थी।
LPG संकट से बंद हो रहे मेस और किचन
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर अब भारत के बड़े शहरों तक पहुंच चुका है। एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने से मुंबई में कई मेस, छोटे किचन और टिफिन सेंटर बंद हो गए हैं या सीमित क्षमता पर काम कर रहे हैं।इसका सीधा असर डब्बावालों के काम पर पड़ा है।
रोजाना 20,000 टिफिन कम, आमदनी आधी
जहां पहले रोज हजारों टिफिन समय पर पहुंचाए जाते थे, अब उस संख्या में तेजी से गिरावट आई है। जानकारी के मुताबिक, रोजाना करीब 20,000 टिफिन कम हो गए हैं, जिससे डब्बेवालों की कमाई लगभग आधी रह गई है। यह स्थिति उनके लिए आर्थिक संकट बनती जा रही है।
“पहली बार इतना बड़ा संकट”, डब्बेवालों की चिंता
एसोसिएशन के प्रतिनिधियों का कहना है कि गैस की कमी का असर अब घरों तक भी पहुंच गया है, जिससे टिफिन भेजने वालों की संख्या घट रही है। डब्बेवाले बताते हैं कि पिछले 100 से अधिक वर्षों में बाढ़, हड़ताल और महामारी जैसे कई संकट आए, लेकिन इस बार एलपीजी की कमी ने पहली बार उनकी सेवा को इतना प्रभावित किया है।
सरकार से हस्तक्षेप की मांग
डब्बेवाले अब राज्य सरकार से तुरंत कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि या तो एलपीजी की आपूर्ति बढ़ाई जाए या वैकल्पिक ईंधन की व्यवस्था की जाए, ताकि यह ऐतिहासिक सेवा जारी रह सके। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो हजारों डब्बेवालों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।
परंपरा बनाम चुनौती
मुंबई की यह अनोखी व्यवस्था दशकों से शहर की लाइफलाइन बनी हुई है। लेकिन मौजूदा हालात ने इसे एक बड़े मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां समय पर निर्णय ही इसे बचा सकता है।