मुशी प्रेमचंद के 10 अनमोल विचार, जो बदल देंगे आपकी जिंदगी

Edited By Updated: 31 Jul, 2019 11:48 AM

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मुंशी प्रेमचंद ऐसे लेखक हैं, जिनकी लिखी कहानियां और उपन्यास हिंदी और उर्दू जानने - पढ़ने वाले हर व्यक्ति ने कभी न कभी जरूर पढ़ा होगा। प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के निकट लमही गांव में हुआ था।

नई दिल्लीः मुंशी प्रेमचंद ऐसे लेखक हैं, जिनकी लिखी कहानियां और उपन्यास हिंदी और उर्दू जानने - पढ़ने वाले हर व्यक्ति ने कभी न कभी जरूर पढ़ा होगा। प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के निकट लमही गांव में हुआ था। प्रेमचंद की माता का नाम आनन्दी देवी और पिता मुंशी अजायबराय लमही में डाकमुंशी थे। मुंशी प्रेमचंद की गोदान, ठाकुर का कुआं, ईदगाह, दो बैलों की कथा, सवा सेर गेहूं, गबन जैसी बहुत सी ऐसी कृतियां हैं, जिनमें वर्णित ग्रामीण परिवेश ज्यादातर मुंशीजी के अपने गांव लमही का ही है। आज हम आपको मुंशी प्रेमचंद के 10 अनमोल विचार के बारे में बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप अपना जीवन सफल कर सकते हैं...
 

 

  • जब हम कोई काम करने की इच्छा करते हैं तो शक्ति अपने आप ही आ जाती है।
  •  खाने और सोने का नाम जीवन नहीं है, जीवन नाम है- आगे बढ़ते रहने की लगन
  •  जहां भावों का संबंध है वहां तर्क और न्याय से काम नहीं चलता।        
  • यदि झूठ बोलने से किसी की जान बचती हो तो, झूठ पाप नहीं पुण्य है
  • नारी और सब कुछ बर्दाश्त कर लेगी, पर अपने मायके की बुराई कभी नहीं
  • अन्याय को बढ़ाने वाले कम अन्यायी नहीं
  • जीवन में सफल होने के लिए ज्ञानवान और शिक्षित होना जरुरी है, सिर्फ डिग्रियां लेना काफी नहीं होता
  • शत्रु का अंत शत्रु के जीवन के साथ ही हो जाता है 
  • आलस्य वह रोग है जिसका रोगी कभी नहीं संभलता
  • क्रोध में व्यक्ति अपने मन की बात नहीं कहता, वह तो केवल दूसरों का दिल दुखाना चाहता है

 

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