इटली की सख्त चेतावनीः ईरान परमाणु कार्यक्रम ‘रेड लाइन’ पार न करे वर्ना..., इजराइल को लेकर भी दी सलाह

Edited By Updated: 03 May, 2026 02:16 PM

italy warns iran against nuclear red line as tehran

इटली ने ईरान को परमाणु हथियार “रेड लाइन” पार न करने की चेतावनी दी है। साथ ही ईरान ने 14 बिंदुओं का शांति प्रस्ताव पेश किया है। होर्मुज संकट, हिज़्बुल्लाह-इजराइल तनाव और अमेरिकी विरोध के बीच कूटनीतिक हल की कोशिशें तेज हो गई हैं।

International Desk: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इटली ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी (Antonio Tajani) ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची  (Abbas Araghchi) से फोन पर बातचीत में कहा कि ईरान का सैन्य परमाणु कार्यक्रम “रेड लाइन” है। ताजानी ने साफ कहा कि अगर ईरान परमाणु हथियार विकसित करता है, तो इससे पूरे क्षेत्र में खतरनाक हथियारों की दौड़ शुरू हो सकती है। उन्होंने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया। इटली ने खास तौर पर Strait of Hormuz को फिर से खोलने की जरूरत बताई।

 

यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। ताजानी ने चेतावनी दी कि अगर यहां बाधा बनी रही तो इसका असर खाद्य सुरक्षा और खासकर अफ्रीका पर पड़ सकता है।  इटली ने ईरान से यह भी कहा कि वह Hezbollah पर दबाव डाले, ताकि वह इजराइल पर हमले बंद करे और लेबनान में शांति बहाल हो सके। इस बीच, ईरान ने एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाते हुए 14 बिंदुओं का शांति प्रस्ताव पेश किया है। ईरानी मीडिया Tasnim News Agency के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य 30 दिनों के भीतर सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना है।

 

इस प्रस्ताव में कई अहम मांगें शामिल हैं, जैसे अमेरिका की सेनाओं की वापसी, समुद्री नाकेबंदी खत्म करना, ईरान की विदेशों में जमी संपत्ति को खोलना और सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को समाप्त करना। ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने कहा कि यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया है और अब फैसला अमेरिका को करना है। हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इस प्रस्ताव पर असंतोष जताया है। उन्होंने कहा कि “ईरान सौदा करना चाहता है, लेकिन मैं इससे संतुष्ट नहीं हूं।” कुल मिलाकर, एक तरफ कूटनीतिक प्रयास तेज हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ अविश्वास और टकराव भी जारी है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि क्या बातचीत से समाधान निकलता है या तनाव और बढ़ता है।

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