Edited By Tanuja,Updated: 02 May, 2026 03:56 PM

ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका के साथ युद्ध फिर भड़क सकता है। तेहरान का दावा है कि उसकी सेना पूरी तरह तैयार है, जबकि रिपोर्ट्स में खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को नुकसान की बात कही गई है। तेल व्यापार और Strait of Hormuz को लेकर तनाव बढ़ता जा...
International Desk: ईरान ने अमेरिका को लेकर बड़ा और सख्त बयान दिया है। ईरानी सैन्य अधिकारी Sardar Asadi ने कहा कि अमेरिका के साथ युद्ध दोबारा भड़क सकता है और ईरान की सेना किसी भी स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका समझौतों का पालन नहीं करता और उसके बयान केवल मीडिया और तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए होते हैं। ईरान ने साफ कहा कि अगर अमेरिका कोई “नई कार्रवाई” करता है, तो उसे जवाब दिया जाएगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया है।
ईरानी सशस्त्र बल ने कहा “हमारे पास जानकारी है कि US फिर से हमला करने की योजना बना रहा है।” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि “अगर ईरान पर हमला हुआ, तो इस क्षेत्र के तेल और गैस को लंबे समय के लिए अलविदा कहना पड़ेगा।” CNN की एक जांच में कहा गया है कि कई अमेरिकी सैन्य ठिकाने प्रभावित हुए हैं। कुवैत के Camp Buehring जैसे बड़े ठिकानों को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है, जहां पहले बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक तैनात थे। बताया गया है कि ईरान के हमलों में खाड़ी के आठ देशों में स्थित कम से कम 16 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा है, जिनमें से कई अब इस्तेमाल के लायक नहीं बचे।
दूसरी ओर, अमेरिका की कार्रवाई से ईरान को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। Pentagon के अनुमान के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नाकेबंदी के कारण ईरान को लगभग 5 अरब डॉलर के तेल राजस्व का नुकसान हुआ है। यह नाकेबंदी खासतौर पर Gulf of Oman और आसपास के समुद्री रास्तों में लागू की गई है, जिससे ईरान के तेल निर्यात पर असर पड़ा है। Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों को सीधे प्रभावित कर सकता है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है। सैन्य गतिविधियां और बयानबाजी स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं। अगर हालात नहीं सुधरे, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर पड़ सकता है।