पूर्व सांसद नरेश गुजराल से 7.8 करोड़ की ठगी, 'बॉस स्कैम' का बड़ा खुलासा

Edited By Updated: 24 Jun, 2026 02:38 PM

naresh gujral duped of 7 8 crore major revelation regarding boss scam

WhatsApp पर आने वाला एक साधारण सा मैसेज लोगों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। "आपका कंपनी अकाउंट बंद होने वाला है, कृपया अपना अकाउंट वेरिफाई करें" जैसे संदेशों के साथ भेजी जा रही ZIP फाइलें अब बड़े साइबर फ्रॉड का जरिया बन गई हैं। एक क्लिक करते ही...

नेशनल डेस्कः WhatsApp पर आने वाला एक साधारण सा मैसेज लोगों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। "आपका कंपनी अकाउंट बंद होने वाला है, कृपया अपना अकाउंट वेरिफाई करें" जैसे संदेशों के साथ भेजी जा रही ZIP फाइलें अब बड़े साइबर फ्रॉड का जरिया बन गई हैं। एक क्लिक करते ही हैकर्स डिवाइस और WhatsApp अकाउंट पर कब्जा कर लेते हैं और फिर कंपनी के मालिक या CEO बनकर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम देते हैं।

दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया है कि इसी तरह के एक "बॉस स्कैम" में पूर्व प्रधानमंत्री आई.के. गुजराल के बेटे और पूर्व सांसद नरेश गुजराल को करीब 7.8 करोड़ रुपये का चूना लगाया गया। यह रकम चार अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए ट्रांसफर की गई थी। इस मामले में दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशन्स (IFSO) यूनिट को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने अमृतसर से 40 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिसके बैंक खाते का इस्तेमाल ठगी की रकम को इधर-उधर भेजने के लिए किया जा रहा था।

पुलिस के मुताबिक, स्कैमर्स सबसे पहले किसी कंपनी के डायरेक्टर या वरिष्ठ अधिकारी को एक संदिग्ध मैसेज भेजते हैं। इस मैसेज में किसी जरूरी सत्यापन या नियमों के पालन का हवाला देकर जल्द कार्रवाई करने का दबाव बनाया जाता है। कई बार ठग खुद को रिजर्व बैंक (RBI) का अधिकारी भी बताते हैं। जब संबंधित व्यक्ति मैसेज के साथ भेजी गई ZIP फाइल खोलता है, तो उसमें मौजूद मैलवेयर उसके सिस्टम और WhatsApp Web सेशन को संक्रमित कर देता है। इसके बाद साइबर अपराधी WhatsApp अकाउंट का कंट्रोल अपने हाथ में ले लेते हैं और खुद को कंपनी के मालिक या वरिष्ठ अधिकारी बताकर कर्मचारियों को पैसे ट्रांसफर करने के निर्देश देने लगते हैं।

जांच में पता चला है कि चोरी की गई रकम को देशभर में फैले 35 बैंक खातों के जरिए इधर-उधर भेजा गया। शुरुआती चरण में पैसे को चार अलग-अलग खातों में बांटा गया, जिनमें दो खाते महाराष्ट्र और एक-एक तेलंगाना तथा आंध्र प्रदेश में थे। पुलिस का कहना है कि इस तरह के "म्यूल अकाउंट्स" का इस्तेमाल ठगी की रकम को छिपाने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जाता है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, देश के कई शहरों से ऐसे 100 से अधिक मामलों की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। साइबर ठग मुख्य रूप से कंपनी मालिकों, CEO और वरिष्ठ अधिकारियों को निशाना बना रहे हैं। जांच के दौरान ऐसे संकेत भी मिले हैं कि कई "बॉस स्कैम" गिरोह कंबोडिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों से संचालित किए जा रहे हैं। हाल ही में इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने भी इस तरह की धोखाधड़ी को लेकर चेतावनी जारी की है।

 

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