बड़ी उपलब्धि: देश में पहली बार दुलर्भ बीमारी से पीड़ित आठ महीने के बच्चे का हुआ लीवर ट्रांसप्लांट

Edited By Anil dev,Updated: 02 Jul, 2022 02:17 PM

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आंध्र प्रदेश के हैदराबाद के सरकारी अस्पताल उस्मानिया सामान्य चिकत्सालय और निलोफर अस्पताल के चिकित्सकों के एक दल ने कुछ दिन पहले आठ महीने के बच्चे में दुर्लभ सिंड्रोम (एनआईएससीएच सिंड्रोम) के लिए यकृत (लीवर) का प्रत्यारोपण किया है।

नेशनल डेस्क: आंध्र प्रदेश के हैदराबाद के सरकारी अस्पताल उस्मानिया सामान्य चिकत्सालय और निलोफर अस्पताल के चिकित्सकों के एक दल ने कुछ दिन पहले आठ महीने के बच्चे में दुर्लभ सिंड्रोम (एनआईएससीएच सिंड्रोम) के लिए यकृत (लीवर) का प्रत्यारोपण किया है। देश में एक छोटे बच्चे का इस तरह के ऑपरेशन का यह पहला मामला है जबकि पूरी दुनिया में यह चौथा मामला है। उस्मानिया सामान्य अस्पताल /कॉलेज के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और लिवर ट्रांसप्लांटेशन विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. सी. मधुसूदन ने यहां एक बयान में शुक्रवार को कहा,‘‘ भारत में एक छोटे बच्चे का इस तरह के ऑपरेशन का यह पहला मामला है जबकि पूरी दुनिया में यह चौथा मामला है।'' 

उन्होंने बताया कि तेलंगाना के जगतियाल जिले के बत्ती पल्ली पोथरम निवासी प्रेमलता (आंगनवाड़ी कार्यकर्ता) और नारायण (दैनिक वेतन कर्मी) के छह किलोग्राम के बच्चे को एनआईएससीएच सिंड्रोम के इलाज के साथ उस्मानिया जनरल अस्पताल, हैदराबाद के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में भेजा गया था। इस बीमारी से पीड़ति बच्चे को पहले हैदराबाद के निलोफर बाल चिकित्सा अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वहां उसका उपचार चला। लेकिन बढ़ते लीवर ने काम करन बन्द कर दिया जिससे बच्चे में पीलिया, , जलोदर और कोगुलोपैथी को देखते हुए बच्चे को लीवर प्रत्यारोपण के लिए उस्मानिया अस्पताल रेफर कर दिया गया। 

उन्होंने कहा,‘‘ इस बच्चे में एनआईएससीएच सिंड्रोम नामक यह दुर्लभ बीमारी आनुवंशिक थी और बच्चे में सूखी पपड़ीदार त्वचा का रोग , खोपड़ी के बाल नहीं (खालित्य) के साथ साथ जन्म से पीलिया, पेट में पानी का निर्माण (जलोदर) भी था। हमने शुरू में दवाओं के साथ इलाज किया लेकिन बच्चे पर उनका कोई असर नहीं हुआ। इसलिए हमने लीवर प्रत्यारोपण करने का फैसला किया और माँ ने अपने बच्चे के लिए लीवर का एक हिस्सा दान कर दिया।'' 

डॉ. मधुसूदन ने कहा कि एनआईएससीएच सिंड्रोम सबसे दुर्लभ सिंड्रोम है और अब तक पूरे विश्व में इस तरह के केवल 18 मामले सामने आए हैं और केवल चार मामलों में लीवर ट्रांसप्लांट हुआ है। भारत में यह पहला मरीज है जिसका इस बीमार के लिए लीवर ट्रांसप्लांट किया गया।सबसे पहला मामला मोरक्को के एक बच्चे में सामने आया था। उन्होंने बताया कि यह एक आनुवंशिक सिंड्रोम है जिनके माता-पिता दोनों करीबी रिश्तेदार होते हैं। इस मामले में भी बच्चे के माता-पिता करीबी रिश्तेदार हैं। इस दम्पत्ती का पहला बच्चा इसी सिंड्रोम से ग्रसित था और जन्म के तुरंत बाद उसकी मृत्यु हो गई थी। 

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