Edited By Anu Malhotra,Updated: 12 Dec, 2025 12:07 PM

भारतीय पेंशन प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ है। अब नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) फंडों को पहली बार सोना और चांदी के एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में निवेश करने की अनुमति मिल गई है। यह कदम निवेशकों को धातुओं की कीमतों में हिस्सेदारी का अवसर देगा और...
नेशनल डेस्क: भारतीय पेंशन प्रणाली में एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ है। अब नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) फंडों को पहली बार सोना और चांदी के एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में निवेश करने की अनुमति मिल गई है। यह कदम निवेशकों को धातुओं की कीमतों में हिस्सेदारी का अवसर देगा और पेंशन फंडों के पोर्टफोलियो को और विविधतापूर्ण बनाएगा।
निवेश के नए अवसर
NPS फंड अब अपने कुल निवेश का लगभग 1% स्वीकृत सोने और चांदी ETFs में निवेश कर सकते हैं।
यह निर्णय लगभग $1.7 बिलियन के संभावित निवेश को खोलता है।
इस पहल से निवेशकों को सोने और चांदी की कीमतों में सीधे हिस्सेदारी लेने का मौका मिलेगा।
हालिया रुझान
इस साल सोने और चांदी ने रिकॉर्ड तोड़ रैली की, जहां सोने में 61% और चांदी में 114% की वृद्धि दर्ज की गई। निवेश विशेषज्ञ इसे महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं क्योंकि यह दर्शाता है कि भारत में कीमती धातुओं को अब मुख्यधारा का निवेश विकल्प माना जा रहा है।
चीन ने भी इसी तरह की पहल की थी, जहां उसके बीमा फर्मों को अपने कुल निवेश का 1% सोने में लगाने की अनुमति दी गई थी। भारत की यह पहल निवेशकों और पेंशन फंड प्रबंधन के दृष्टिकोण से सोने की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है।
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विशेषज्ञों की राय
कविता चको, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की भारत रिसर्च हेड, कहती हैं: "यह एक बड़ा कदम है क्योंकि पहली बार भारतीय नियामक ने पेंशन फंडों को सोने में निवेश की अनुमति दी है। यह सोने की विशेषताओं को एक प्रभावी पोर्टफोलियो डाइवर्सिफ़ायर के रूप में मजबूत करता है।"
NPS का महत्व
NPS भारत में दो दशकों से अधिक समय से संचालित है।
यह लगभग $177 बिलियन के टैक्स-इफिशिएंट रिटायरमेंट फंड्स का संचालन करता है।
देश में वित्तीय उत्पादों में बढ़ती रुचि और लगातार बढ़ते शेयर बाजार के बीच सोने और चांदी में निवेश का यह कदम और अधिक आकर्षक बनता है।
भारत में सोने और चांदी की लोकप्रियता
भारत हमेशा दुनिया के शीर्ष सोने उपभोक्ताओं में रहा है, ज्यादातर चीन के बाद दूसरे स्थान पर। परंपरागत रूप से गहनों की मजबूत मांग के कारण सोना और चांदी निवेशकों के लिए पसंदीदा विकल्प रहे हैं। ETFs ने इन धातुओं में निवेश का आधुनिक तरीका प्रदान किया है और इस साल इसके रजिस्ट्रेशन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है।