Edited By Anu Malhotra,Updated: 29 Aug, 2026 11:22 AM

नेपाल और तिब्बत बाॅर्डर पर आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। इस खौफनाक मंजर के बीच एक भावुक कर देने वाली खबर भी सामने आई है। इस भयावह बाढ़ में लापता हुआ 8 साल का मासूम ज़ोयल घाले एक बार फिर से अपनी मां को मिल गया। ज़ोयल घाले, जो...
नेपाल: नेपाल और तिब्बत बाॅर्डर पर आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। इस खौफनाक मंजर के बीच एक भावुक कर देने वाली खबर भी सामने आई है। इस भयावह बाढ़ में लापता हुआ 8 साल का मासूम ज़ोयल घाले एक बार फिर से अपनी मां को मिल गया। ज़ोयल घाले, जो नेपाल की खतरनाक बाढ़ से बचने के लिए जंगल में भागकर पेड़ पर चढ़ गया था, शुक्रवार को अपनी मां से दोबारा मिल गया। उसकी मां को डर था कि वह और उसका भाई दोनों स्कूल में ही मारे गए होंगे।
दरअसल, बुधवार सुबह लांगटांग लिरुंग पर्वत चोटी के पास ग्लेशियर का निचला हिस्सा अचानक ढह गया। जिसके बाद बर्फ, पानी, पत्थरों और मलबे का ऐसा सैलाब आया कि पूरे इलाके का नामुनिशान मिटा दिया। इस बीच रसुवा ज़िले में रहने वाली मट्टी माया तमांग जब अपने घर पर बुनाई कर रही थीं, तभी उन्हें भूकंप जैसा जोरदार धमाका सुनाई दिया। देखते ही देखते सब कुछ बहने लगा। जिस स्कूल में उनके दो छोटे बेटे पढ़ने गए थे, वह इमारत भी बाढ़ की चपेट में आकर पूरी तरह नष्ट हो गई।
8 साल का ज़ोयल घाले उस वक्त अपने स्कूल में ही पढ़ाई कर रहा था। ज़ोयल के मुताबिक, अचानक चारों तरफ अंधेरा छा गया। जान बचाने के लिए वह अपने एक दोस्त के साथ पास के जंगल की तरफ भागा और एक ऊंचे पेड़ पर चढ़ गया। बाढ़ का खौफनाक पानी नीचे से बहता रहा और ज़ोयल पेड़ पर टिके रहकर अपनी जान बचाने में कामयाब रहा।
एक दिन पहले, 8 साल के ज़ोयल घाले को बुरी तरह प्रभावित उत्तरी ज़िले रसुवा से अकेले एयरलिफ़्ट करके निकाला गया था, उसका पैर टूटा हुआ था और चेहरे पर चोटें थीं। वहीं उसकी 28 साल की मां मट्टी माया तमांग अपने दो लापता बच्चों की तलाश में एक शेल्टर और कलेक्शन पॉइंट से दूसरे पर जा रही थीं। तमांग ने बताया, मेरे बच्चों के नाम लिस्ट में नहीं थे और वे वहां नहीं थे। मैंने मान लिया था कि मेरे दोनों बच्चे अब नहीं रहे। मैं बस रो सकती थी। मैं खुद को बिल्कुल भी संभाल नहीं पा रही थी।
काफी खोजबीन के बाद, गुरुवार को तमांग को रॉयटर्स की पत्रकार सहाना बज्राचार्य का फ़ोन नंबर मिला, जो कुछ घंटे पहले ही पड़ोसी नुवाकोट ज़िले के एक छोटे से अस्पताल में ज़ोयल घाले से मिली थीं। मट्टी को बताया कि ज़ोयल ज़िंदा है और उसे बेहतर इलाज के लिए काठमांडू के बड़े अस्पताल में एयरलिफ्ट किया गया है। यह सुनते ही मां की आंखों से आंसू छलक पड़े। तमांग को बाद में अपना छोटा बेटा भी एक अन्य स्थान पर सुरक्षित मिल गया। उन्होंने कहा, बड़े बेटे के मिलने के बाद मुझे लगा कि मेरी ज़िंदगी वापस आ गई है।
UN की बच्चों की एजेंसी UNICEF के मुताबिक, काठमांडू के उत्तर में स्थित रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग ज़िलों में बाढ़ से कम से कम 17,000 बच्चे प्रभावित हुए हैं।