Delhi New Rules : अब इन वाहनों को दिल्ली में नहीं मिलेगी एंट्री, सरकार ने किया बड़ा ऐलान

Edited By Updated: 19 Jun, 2026 05:09 PM

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दिल्ली सरकार ने सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए समय से पहले तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को बताया कि सरकार ने "प्रोएक्टिव विंटर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट फ्रेमवर्क" को पहले ही अधिसूचित कर दिया है,...

नेशनल डेस्क : दिल्ली सरकार ने सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए समय से पहले तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को बताया कि सरकार ने "प्रोएक्टिव विंटर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट फ्रेमवर्क" को पहले ही अधिसूचित कर दिया है, ताकि नागरिकों, उद्योगों और अन्य संबंधित पक्षों को आवश्यक तैयारियों के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि यह फ्रेमवर्क सर्दियों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक अग्रिम रणनीति के तहत तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य प्रदूषण का स्तर बढ़ने से पहले ही आवश्यक उपायों को लागू करना और लोगों को संभावित परेशानियों से बचाना है।

उन्होंने कहा कि यह फ्रेमवर्क हर वर्ष 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहने वाले ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के साथ समन्वय में काम करेगा।

ईंधन भरवाने के लिए PUCC अनिवार्य

नए फ्रेमवर्क के तहत केवल वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (PUCC) वाले वाहनों को ही पेट्रोल पंपों पर ईंधन भरवाने की अनुमति दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान और नियंत्रण आसान होगा।

नॉन-BS VI कमर्शियल वाहनों की एंट्री पर रोक

सरकार ने 1 नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत नॉन-BS VI कमर्शियल वाहनों के राजधानी में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ-साथ आपातकालीन सेवाओं तथा सरकारी कार्यों में लगे वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट मिलेगी।

पार्किंग शुल्क होगा दोगुना

निजी वाहनों के उपयोग को कम करने के लिए अधिकृत पार्किंग स्थलों पर 1 नवंबर से 28 फरवरी तक पार्किंग शुल्क दोगुना किया जाएगा। इसके अलावा, आवश्यकता पड़ने पर कार्यालयों के समय में बदलाव और सरकारी एवं निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत तक भौतिक उपस्थिति की व्यवस्था भी लागू की जा सकती है।

निर्माण कार्यों पर रहेगी कड़ी निगरानी

फ्रेमवर्क के अनुसार 1 नवंबर से 31 जनवरी तक निर्माण और विध्वंस स्थलों पर धूल नियंत्रण संबंधी मानकों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा। यदि प्रदूषण का स्तर गंभीर स्थिति में पहुंचता है तो 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच निर्माण गतिविधियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

बड़े निर्माण स्थलों और प्रमुख इमारतों में एंटी-स्मॉग गन तथा मिस्ट-सप्रेशन सिस्टम लगाना भी अनिवार्य किया जाएगा।

खुले में कचरा जलाने पर सख्ती

सरकार खुले में कचरा और अन्य सामग्री जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करेगी। इसके लिए ड्रोन सर्विलांस और फील्ड इंस्पेक्शन का सहारा लिया जाएगा।

सर्दियों में क्यों बढ़ जाता है प्रदूषण?

दिल्ली में अक्टूबर से फरवरी के बीच वायु गुणवत्ता अक्सर "बहुत खराब" या "गंभीर" श्रेणी में पहुंच जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, थर्मल इन्वर्जन, पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना और हवा की कम गति सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारण हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सर्दियों के प्रदूषण से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए समय रहते तैयारी करना सबसे जरूरी है और सरकार इस दिशा में मिशन मोड में काम कर रही है।

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