Edited By Sanjeev,Updated: 27 Sep, 2026 07:59 AM

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) को लेकर जानबूझकर जनता को गुमराह कर रहे हैं और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रहे हैं। 'X' पर एक विस्तृत पोस्ट में...
नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) को लेकर जानबूझकर जनता को गुमराह कर रहे हैं और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रहे हैं। 'X' पर एक विस्तृत पोस्ट में नवीन ने कहा कि SIR के बारे में झूठ फैलाने के लिए विपक्ष का पर्दाफाश हो गया है। उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने स्पष्ट रूप से कहा है कि SIR से संबंधित हर निर्णय पूरे आयोग ने सर्वसम्मति से लिया था।
इस स्पष्टीकरण के बावजूद उन्होंने आरोप लगाया, 'कांग्रेस ने एक मनगढ़ंत झूठ के आधार पर अपनी पूरी कहानी गढ़ी और देश की संवैधानिक संस्थाओं पर हमले किए।' विपक्ष के दोहरे रवैये पर प्रकाश डालते हुए नवीन ने लिखा कि जब इसी चुनावी प्रक्रिया से केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में कांग्रेस और उसके सहयोगियों को जीत मिली, तो इसकी विश्वसनीयता को स्वीकार किया गया। उन्होंने कहा, 'लेकिन जब कहीं और जनादेश उनके खिलाफ जाता है, तो वे उन्हीं संस्थाओं पर सवाल उठाते हैं जो चुनाव कराती हैं। लोकतंत्र का सम्मान चुनिंदा तरीके से नहीं किया जा सकता।'
उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक राजनीति में जीत और हार स्वाभाविक है, लेकिन सम्मानित संस्थाओं को बदनाम करने के लिए दुर्भावनापूर्ण प्रचार का सहारा लेना "बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य" है। नवीन ने कहा कि जो लोग राजनीतिक अस्तित्व के लिए बार-बार भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करते हैं, उन्हें देश के प्रति ईमानदारी से जवाबदेही तय करनी चाहिए और सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ECI की SIR प्रक्रिया गहन राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, जबकि BJP ने लगातार चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और पारदर्शिता का बचाव किया है। नवीन के बयान को विपक्ष के आरोपों का कड़ा जवाब माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में उनके पोस्ट ने काफी ध्यान आकर्षित किया है, क्योंकि सत्ताधारी पार्टी उन दावों का लगातार खंडन कर रही है जो चुनावी प्रक्रियाओं और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर संदेह पैदा करते हैं।