Edited By Rohini Oberoi,Updated: 22 Mar, 2026 03:54 PM

मोटापा घटाने के लिए अब तक आपने कसरत और डाइट के बारे में सुना होगा लेकिन अब वैज्ञानिक अजगर (Python) की मदद से मोटापे के खिलाफ जंग जीतने की तैयारी कर रहे हैं। हाल ही में हुए एक शोध में बर्मी अजगर के खून में एक ऐसे अणु (Molecule) की पहचान की गई है जो...
Python Blood Weight Loss Research : मोटापा घटाने के लिए अब तक आपने कसरत और डाइट के बारे में सुना होगा लेकिन अब वैज्ञानिक अजगर (Python) की मदद से मोटापे के खिलाफ जंग जीतने की तैयारी कर रहे हैं। हाल ही में हुए एक शोध में बर्मी अजगर के खून में एक ऐसे अणु (Molecule) की पहचान की गई है जो भूख को कंट्रोल कर वजन घटाने की अचूक दवा साबित हो सकता है।
अजगर के खून में क्या है खास?
अजगर अपनी अजीबोगरीब खान-पान की आदतों के लिए जाने जाते हैं। वे अपने वजन के बराबर शिकार को एक बार में निगल लेते हैं और फिर महीनों तक बिना खाए रह सकते हैं। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के जोनाथन लॉन्ग के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने पाया कि शिकार निगलने के बाद अजगर के खून में कुछ अणुओं की मात्रा अचानक बढ़ जाती है। वैज्ञानिकों ने 200 से अधिक ऐसे अणुओं की पहचान की जिनमें से एक खास अणु 'pTOS' की मात्रा भोजन के बाद 1,000 गुना तक बढ़ गई।
कैसे काम करता है यह जादुई 'pTOS'?
यह अणु असल में आंतों के बैक्टीरिया द्वारा पैदा किया जाता है और इंसानों में भी बहुत कम मात्रा में पाया जाता है। वैज्ञानिकों ने इसका परीक्षण मोटे चूहों पर किया:
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भूख पर लगाम: जब चूहों को pTOS दिया गया तो उन्होंने खाना कम कर दिया।
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तेजी से वजन घटा: महज 28 दिनों के भीतर चूहों के शरीर का वजन 9 प्रतिशत तक कम हो गया।
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दिमाग पर असर: यह अणु सीधे मस्तिष्क के 'हाइपोथैलेमस' हिस्से पर असर करता है जो भूख को नियंत्रित करता है।
मौजूदा दवाओं से बेहतर क्यों है यह खोज?
वर्तमान में वजन घटाने के लिए 'वेगोवी' जैसी दवाओं का इस्तेमाल होता है लेकिन उनके कई साइड इफेक्ट्स जैसे मतली (जी मिचलाना) और पाचन में दिक्कत होती है। रिसर्चर्स का दावा है कि यह नई तकनीक पेट को धीरे खाली करने के बजाय सीधे दिमाग को 'पेट भरा होने' का संकेत देती है जिससे मतली जैसे दुष्प्रभाव नहीं होते। चूंकि यह अणु इंसानी शरीर में भी मिलता है इसलिए इसके सुरक्षित होने की संभावना ज्यादा है।
आगे की राह
'नेचर मेटाबॉलिज्म' पत्रिका में प्रकाशित यह शोध अभी शुरुआती चरण में है। हालांकि चूहों पर इसके परिणाम उत्साहजनक रहे हैं लेकिन इंसानों के लिए इसे सुरक्षित बनाने और दवा के रूप में बाजार में उतारने के लिए अभी और परीक्षण किए जाने बाकी हैं।