देश में तेजी से बढ़ा मोटापा और Blood Sugar, पुरुषों से ज्यादा महिलाएं हो रही शिकार

Edited By Updated: 31 May, 2026 12:51 PM

obesity is on the rise in the country with more women suffering from it than men

देश में वयस्कों के बीच मोटापा (Obesity) और हाई ब्लड शुगर (High Blood Sugar) की समस्या एक गंभीर महामारी का रूप लेती जा रही है। हाल ही में जारी हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के आंकड़ों ने एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है।

NFHS 6 Survey India Report : देश में वयस्कों के बीच मोटापा (Obesity) और हाई ब्लड शुगर (High Blood Sugar) की समस्या एक गंभीर महामारी का रूप लेती जा रही है। हाल ही में जारी हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के आंकड़ों ने एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पुरुषों की तुलना में महिलाएं मोटापे का शिकार तेजी से हो रही हैं जिससे जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। सर्वेक्षण के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में देश के नागरिकों की सेहत में बड़ा बदलाव आया है:

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स्वास्थ्य मानक (15-49 वर्ष आयु वर्ग),           पिछला सर्वे (2019-21),              नया सर्वे (2023-24)
मोटापे से ग्रस्त महिलाएं,                                         24.0%,                                           30.7%
मोटापे से ग्रस्त पुरुष,                                             22.9%,                                            27.3%
हाई ब्लड शुगर से पीड़ित महिलाएं (15+ आयु),         13.5%,                                            17.8%
हाई ब्लड शुगर से पीड़ित पुरुष (15+ आयु),              15.6%,                                            20.9%

जानें कहां है सबसे ज्यादा मोटापा?

महिलाएं: देश में मोटापे की सबसे ऊंची दर पुडुचेरी (46.3%) में दर्ज की गई। इसके बाद चंडीगढ़ (44%), दिल्ली (41.4%) और पंजाब (40.8%) का नंबर आता है। वहीं बिहार, छत्तीसगढ़ और असम में यह दर काफी कम रही। पुरुषों में सबसे ज्यादा मोटापा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (करीब 38%) में मिला। इसके बाद पंजाब, केरल, तमिलनाडु, दिल्ली और गोवा का स्थान रहा। इस रिपोर्ट में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर कुछ बेहद सकारात्मक और अच्छी खबरें भी सामने आई हैं।

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साफ पानी और बेहतर टीकाकरण के चलते 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में डायरिया (दस्त) के मामले 0.7% से घटकर 0.5% रह गए हैं। जन्म के 1 घंटे के भीतर नवजात शिशु को स्तनपान कराने का आंकड़ा 41.8% से बढ़कर 50.1% हो गया है। इसके अलावा 6 महीने से कम उम्र के 95.6% बच्चों को मां का दूध मिल रहा है। सर्वेक्षण में महिलाओं के स्वास्थ्य और सामाजिक आदतों से जुड़े दो बड़े पहलू भी सामने आए हैं:

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15-24 वर्ष की युवतियों में पीरियड्स के दौरान सुरक्षा के स्वच्छ तरीकों (जैसे सेनेटरी पैड) का इस्तेमाल 77.6% से बढ़कर 79.2% हो गया है। एक चौंकाने वाले बदलाव के तहत विवाहित महिलाओं के बीच आधुनिक गर्भनिरोधकों का इस्तेमाल 56.4% से घटकर 52.7% हो गया है। इसके विपरीत, परिवार नियोजन के पारंपरिक तरीकों पर निर्भरता 10.3% से बढ़कर 16.4% हो गई है।

वहीं विशेषज्ञों के अनुसार खान-पान में लापरवाही, शारीरिक श्रम की कमी और मानसिक तनाव के कारण युवाओं में मोटापा और शुगर की बीमारी बढ़ रही है। इस पर समय रहते ध्यान देना बेहद जरूरी है।

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