Edited By Parveen Kumar,Updated: 14 Aug, 2026 05:51 PM

दो दिनों से हो रही भारी बारिश के बाद ओडिशा के कम से कम पांच जिले फिर बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इसके मद्देनजर प्रशासन ने निचले इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है और राहत केंद्र खोले हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी...
नेशनल डेस्क : दो दिनों से हो रही भारी बारिश के बाद ओडिशा के कम से कम पांच जिले फिर बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इसके मद्देनजर प्रशासन ने निचले इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है और राहत केंद्र खोले हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, बालासोर, मयूरभंज, भद्रक, जाजपुर और क्योंझर जिले फिर से बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। विशेष राहत आयुक्त (एसआरसी) राजेश प्रवाकर पाटिल ने बताया कि बालासोर, मयूरभंज, भद्रक और जाजपुर जिलों की 45 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों को निकालकर राहत केंद्रों में पहुंचाया जा रहा है, जहां उन्हें पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जलका और बुधबलंग नदियों का जलस्तर बढ़ने से बालासोर शहर, बस्ता और भोगराई इलाके में बाढ़ की स्थिति पैदा हुई है। प्रभावित लोगों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
पाटिल ने कहा कि बालासोर जिला प्रशासन को सतर्क कर दिया गया है क्योंकि सुवर्णरेखा नदी का जलस्तर भी बढ़ रहा था। उन्होंने कहा, "बालासोर, मयूरभंज, जाजपुर और भद्रक जिलों में बचाव कार्य के लिए ओडिशा आपदा मोचन बल (ओडीआरएएफ) की 10 और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की सात टीमों सहित कम से कम 17 बचाव दल तैनात किए गए हैं। इसके अलावा अग्निशमन कर्मियों को भी राहत एवं बचाव कार्यों में लगाया गया है।" एक अन्य अधिकारी ने बताया कि भारी बारिश के कारण बैतरणी नदी का जलस्तर बढ़ने से क्योंझर जिले में भी बाढ़ की स्थिति बन गई है। उन्होंने कहा कि जोडा, चंपुआ, बारबिल और आनंदपुर प्रखंड प्रभावित हुए हैं और आनंदपुर रिंग तटबंध में दरार पड़ने के बाद पानी रिहायशी इलाकों में घुस गया है। अधिकारी ने बताया कि सेरेंडा के पास एक राज्य राजमार्ग जलमग्न है।
प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों से लोगों को निकालकर बाढ़ राहत शिविरों में पहुंचाया है। बालासोर जिले के एक अधिकारी ने बताया कि बस्ता प्रखंड की 17 पंचायतों के करीब 90 गांव जलका नदी के पानी से प्रभावित हुए हैं। बस्ता के मथानी इलाके में जलका नदी 7.4 मीटर के स्तर पर बह रही थी, जबकि इसका खतरे का निशान 6.5 मीटर है। उन्होंने बताया कि बचाव अभियान के लिए ओडीआरएएफ की तीन टीमों और अग्निशमन कर्मियों को तैनात किया गया है।
अधिकारी ने कहा कि इस मानसून में जिले में दूसरी बार बाढ़ आई है। बुधबलंग, जलका और सुवर्णरेखा जैसी प्रमुख नदियां उफान पर हैं। उन्होंने बताया कि बुधबलंग नदी चेतावनी स्तर को पार कर गई है और प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों से करीब 3,000 लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। जलका और बुधबलंग नदियों के निचले इलाकों में स्थित कई गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
मयूरभंज जिले के एक अधिकारी ने बताया कि बुधबलंग नदी का पानी बारीपदा नगर पालिका क्षेत्र के निचले इलाकों में घुस गया है और प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज रहा है। मयूरभंज के रसगोविंदपुर प्रखंड में सारुमूला के पास पुल के ऊपर लगभग चार फीट पानी बह रहा था, जिससे यातायात बाधित हुआ। बारीपदा-अमरदा सड़क भी इससे प्रभावित हुई है। बांगिरीपोसी में बुधबलंग कालियामी ब्रिज के ऊपर से बह रही थी।
एक और अधिकारी ने बताया कि बैतरणी नदी और उसकी सहायक नदी कानी में जलस्तर बढ़ने के कारण जाजपुर जिले में इस मॉनसून में चौथी बार बाढ़ आई। उन्होंने बताया कि तरपदा पंचायत के डोवाबिल पाटना में तटबंध टूटने से कानी नदी का पानी कई गांवों में प्रवेश कर गया है। कई गांव जलमग्न हो गए हैं और सड़क संपर्क भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने सुंदरगढ़, बरगढ़, संबलपुर और झारसुगुड़ा जिलों के लिए शनिवार सुबह साढ़े आठ बजे तक भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान जताते हुए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। इसमें 14 अन्य जिलों में भी भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। समुद्र में स्थिति खराब रहने के अनुमान को देखते हुए मछुआरों को सलाह दी गई है कि वे 15 अगस्त की सुबह तक बंगाल की खाड़ी में न जाएं।