शोक में डूबा खेल जगत... नहीं रहे Olympian राजा रणधीर सिंह, 79 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

Edited By Updated: 27 May, 2026 02:48 PM

olympian raja randhir singh is no more

भारतीय खेल जगत के लिए आज का दिन एक अपूरणीय क्षति और गहरे शोक का है। देश के अनुभवी खेल प्रशासक और एशियाई खेलों में निशानेबाजी (Shooting) का पहला स्वर्ण पदक जीतने वाले दिग्गज ओलंपियन राजा रणधीर सिंह का आज निधन हो गया। वह 79 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय...

Raja Randhir Singh Passes Away : भारतीय खेल जगत के लिए आज का दिन एक अपूरणीय क्षति और गहरे शोक का है। देश के अनुभवी खेल प्रशासक और एशियाई खेलों में निशानेबाजी (Shooting) का पहला स्वर्ण पदक जीतने वाले दिग्गज ओलंपियन राजा रणधीर सिंह का आज निधन हो गया। वह 79 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे थे। 

कई दिनों तक अस्पताल में इलाज कराने के बाद उन्होंने अपने दिल्ली स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से भारतीय खेलों के उस स्वर्णिम अध्याय का अंत हो गया है जिसे उन्होंने खिलाड़ी और प्रशासक दोनों रूपों में संवारा था। राजा रणधीर सिंह के परिवार में उनकी पत्नी विनीता और तीन बेटियां महिमा, सुनैना और राजेश्वरी हैं।

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राजेश्वरी भी एक निशानेबाज हैं। स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के कारण सिंह ने हाल में एशियाई ओलंपिक परिषद (ओसीए) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्हें 2024 में चार साल के कार्यकाल के लिए चुना गया था जबकि वह 1991 से 2015 तक इस संस्था में महासचिव रह चुके थे। 

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भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के सचिव राजीव भाटिया ने कहा, ''गहरे दुख के साथ हम राजा रणधीर सिंह के निधन की दुखद खबर साझा कर रहे हैं जो आज 27 मई 2026 को स्वर्ग सिधार गए। उन्होंने कहा, एक विशिष्ट ओलंपियन, अर्जुन पुरस्कार विजेता और भारत, एशिया और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति में सबसे सम्मानित खेल प्रशासकों में से एक राजा रणधीर सिंह ने निशानेबाजी खेल और ओलंपिक आंदोलन के विकास में अमूल्य योगदान दिया।

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भाटिया ने कहा, एनआरएआई और पूरा निशानेबाजी समुदाय इस अपूरणीय क्षति पर शोक व्यक्त करता है और उनके परिवार तथा प्रियजनों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करता है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। सिंह के शानदार खेल करियर में पांच ओलंपिक में भागीदारी और 1978 के बैंकॉक एशियाई खेलों में ऐतिहासिक ट्रैप स्वर्ण पदक शामिल था जिससे उन्हें 1979 में अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया था। 

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उन्होंने तोक्यो 1964 (रिजर्व निशानेबाज), मेक्सिको 1968, म्यूनिख 1972, मॉन्ट्रियल 1976, मॉस्को 1980 और लॉस एंजिल्स 1984 में ओलंपिक में हिस्सा लिया। खेलों की तरह ही अपने सफल प्रशासनिक करियर में उन्होंने 1987 से 2010 तक भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के महासचिव के तौर पर तथा 2001 से 2014 तक अलग अलग भूमिकाओं में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के सदस्य के रूप में कार्य किया। वह 2003 में दो साल के लिए विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) में आईओसी के प्रतिनिधि बन गए। 

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पटियाला के पूर्व महाराजा और क्रिकेटर भूपिंदर सिंह के वंशज रणधीर सिंह भारत के सबसे जाने-माने खेल प्रशासकों में से एक थे। भारतीय खेलों की अक्सर बिखरी हुई प्रशासनिक व्यवस्था में आम सहमति बनाने की अपनी काबिलियत के लिए उनकी प्रशंसा की जाती थी। देश में ओलंपिक आंदोलन को बढ़ावा देने का श्रेय भी बड़े पैमाने पर उन्हें ही दिया जाता था। 

उनकी बेटी राजेश्वरी ने उनकी निशानेबाजी की विरासत को बरकरार रखा और वह भी ट्रैप निशानेबाज हैं। राजेश्वरी ने 2022 के एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने के अलावा 2016 की एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक भी जीता था। वहीं उनकी बेटी सुनैना ने 2018 में आईओए की उपाध्यक्ष बनकर खेल प्रशासन में अपनी एक अलग जगह बनाई। वह आईओए की अंतरराष्ट्रीय संबंधों और शिक्षा समिति की सदस्य भी हैं। 

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