Alert Parents! ऑनलाइन कोरियन गेम का खौफ जो बच्चों की ले रहा जान, जानें ये क्यों है इतनी खतरनाक?

Edited By Updated: 05 Feb, 2026 02:40 PM

online korean games are killing children

डिजिटल युग में आपके बच्चे के हाथ में मौजूद मोबाइल फोन अब एक घातक हथियार बनता जा रहा है। गाजियाबाद में तीन किशोरियों की रहस्यमयी मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस और साइबर विशेषज्ञों की शुरुआती जांच में एक डरावना सच सामने आया है यह मौतें...

Online Korean Game Danger : डिजिटल युग में आपके बच्चे के हाथ में मौजूद मोबाइल फोन अब एक घातक हथियार बनता जा रहा है। गाजियाबाद में तीन किशोरियों की रहस्यमयी मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस और साइबर विशेषज्ञों की शुरुआती जांच में एक डरावना सच सामने आया है यह मौतें किसी हादसे का नहीं बल्कि एक खतरनाक 'ऑनलाइन कोरियन गेम' (Online Korean Game) का परिणाम हैं। यह घटना हर उस माता-पिता के लिए एक गंभीर चेतावनी है जिनके बच्चे घंटों मोबाइल स्क्रीन में खोए रहते हैं।

क्या है यह मौत का कोरियन गेम?

साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक इंटरनेट पर ऐसे कई विदेशी और कोरियाई गेमिंग ऐप्स सक्रिय हैं जो बच्चों का ब्रेनवॉश (Brainwash) कर उन्हें अपनी काल्पनिक दुनिया का कैदी बना लेते हैं। ये गेम्स रोल प्लेइंग पर आधारित होते हैं। इनमें K-Pop कल्चर के आकर्षक किरदारों का इस्तेमाल होता है। गाजियाबाद की लड़कियां भी इस कदर प्रभावित थीं कि वे खुद को कोरियाई राजकुमारी समझने लगी थीं। गेम की शुरुआत आसान होती है लेकिन आगे चलकर यह बच्चों को खुद को नुकसान पहुंचाने वाले टास्क देता है जैसे नस काटना या ऊंची इमारत से कूदना। गेम एडमिन अक्सर बच्चों की निजी जानकारी चुरा लेते हैं। अगर बच्चा गेम छोड़ना चाहे तो उसे डराया-धमकाया जाता है जिससे डरकर बच्चे जानलेवा कदम उठा लेते हैं।

गैजेट्स का दुरुपयोग: एक साइलेंट किलर

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि मोबाइल का अंधाधुंध इस्तेमाल बच्चों को अकेलेपन और डिप्रेशन की ओर धकेल रहा है। बच्चे अब असली दोस्तों के बजाय डिजिटल किरदारों में अपनी हार-जीत तलाश रहे हैं। कई प्रतिबंधित गेम्स गूगल प्ले स्टोर पर नहीं मिलते लेकिन बच्चे इन्हें APK फाइल्स या डार्क वेब के जरिए डाउनलोड कर लेते हैं। दोस्तों के बीच कूल दिखने की होड़ (Fear of Missing Out) बच्चों को इन जानलेवा खेलों का हिस्सा बना देती है।

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डराने वाले आंकड़े और एक्सपर्ट्स की राय

एक सर्वे के अनुसार भारत में 12 से 18 साल के बच्चे रोजाना 6 से 8 घंटे मोबाइल पर बिता रहे हैं।

"माता-पिता को अब 'डिजिटल पेरेंटिंग' सीखनी होगी। बच्चे को फोन थमा देना आपकी जिम्मेदारी खत्म करना नहीं बल्कि खतरे को न्योता देना है।" - NCPCR अधिकारी

बचाव के तरीके: माता-पिता क्या करें?

  1. व्यवहार पर नजर रखें: अगर बच्चा अचानक चिड़चिड़ा हो जाए, रात भर जागकर फोन चलाए या परिवार से कटना शुरू कर दे, तो सतर्क हो जाएं।

  2. ब्राउजिंग हिस्ट्री चेक करें: समय-समय पर देखें कि बच्चा किस तरह के ऐप्स और वेबसाइट्स का इस्तेमाल कर रहा है।

  3. डिजिटल डिटॉक्स: बच्चों के साथ स्क्रीन-फ्री समय बिताएं और उन्हें आउटडोर खेलों के लिए प्रोत्साहित करें।

  4. APK फाइल्स ब्लॉक करें: फोन की सेटिंग्स में 'Unknown Sources' से ऐप डाउनलोड करने का विकल्प बंद रखें।

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