Edited By Pardeep,Updated: 04 Feb, 2026 10:15 PM

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने पंजाब पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही के मामले को विस्तृत जांच एवं रिपोर्ट के लिए विधानसभा की विशेषाधिकार समिति को सौंप दिया है। 6 जनवरी 2026 को दिल्ली विधान सभा के पटल पर माननीय नेता प्रतिपक्ष आतिशी द्वारा...
नई दिल्लीः दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने पंजाब पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही के मामले को विस्तृत जांच एवं रिपोर्ट के लिए विधानसभा की विशेषाधिकार समिति को सौंप दिया है। 6 जनवरी 2026 को दिल्ली विधान सभा के पटल पर माननीय नेता प्रतिपक्ष आतिशी द्वारा दिए गए बयानों के संबंध में पंजाब पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई से जुड़े मामले पर गुप्ता ने यह संज्ञान लिया है। पंजाब पुलिस द्वारा प्रस्तुत जवाब तथा दिल्ली कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा से प्राप्त शिकायत पर विचार करने के उपरांत माननीय अध्यक्ष ने यह निष्कर्ष निकाला कि प्रथम दृष्टया सदन के विशेषाधिकार के उल्लंघन एवं सदन की अवमानना का मामला बनता है।
यह मामला तब उठा था जब पंजाब पुलिस ने इकबाल सिंह की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की तथा यह सार्वजनिक रूप से कहा गया कि दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही से संबंधित एक वीडियो क्लिप को संपादित अथवा छेड़छाड़ कर प्रस्तुत किया गया है। चूंकि यह विषय सीधे तौर पर सदन की कार्यवाही से संबंधित है, जो विधायिका के विशेषाधिकार क्षेत्र में आती है, इसलिए दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने पंजाब पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा था तथा यह सूचित किया था कि अध्यक्ष महोदय एवं सदन पहले से ही इस विषय पर संज्ञान ले चुके हैं और विधानसभा की कार्यवाही से संबंधित किसी भी शिकायत अथवा कार्रवाई से पूर्व माननीय अध्यक्ष के संज्ञान में लाया जाना आवश्यक था।
विधानसभा द्वारा की गई मांग के बाद पंजाब के पुलिस महानिदेशक तथा जालंधर के पुलिस आयुक्त ने लिखित उत्तर प्रस्तुत किए, जिनमें यह कहा गया कि पुलिस ने विधि एवं उपलब्ध सामग्री के आधार पर कार्रवाई की है, कथित कार्य विधानसभा के बाहर के व्यक्तियों द्वारा किए गए हैं, यह विषय विधायी विशेषाधिकार के अंतर्गत नहीं आता, पुलिस की जांच संबंधी जवाबदेही केवल न्यायालयों के प्रति है तथा विधानसभा के नियमों के अनुसार न्यायालयों के क्षेत्राधिकार में आने वाले विषयों पर विधानसभा विचार नहीं कर सकती। माननीय अध्यक्ष ने इन स्पष्टीकरणों को असंतोषजनक मानते हुए खारिज कर दिया।
माननीय अध्यक्ष ने यह भी संज्ञान में लिया कि बार-बार स्मरण कराने के बावजूद पंजाब पुलिस प्राधिकरणों द्वारा आवश्यक दस्तावेज, जिनमें शिकायत की कॉपी, प्राथमिकी की कॉपी, पंजाब पुलिस के सोशल मीडिया विशेषज्ञ की रिपोर्ट तथा फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशाला (पंजाब) की रिपोर्ट सम्मिलित हैं, विधानसभा सचिवालय को उपलब्ध नहीं कराई गईं। उक्त सामग्री अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), पंजाब सरकार के माध्यम से भेजी गई, परंतु अब तक विधानसभा सचिवालय को प्राप्त नहीं हुई है।
माननीय अध्यक्ष ने यह भी उल्लेख किया कि फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशाला (पंजाब) के निदेशक के साथ हुए पत्राचार से यह स्पष्ट हुआ कि फॉरेंसिक रिपोर्ट केवल संबंधित पुलिस अधिकारियों को ही उपलब्ध कराई गई थी। सदन में की गई घोषणा के अनुरूप, विधानसभा सचिवालय दद्वारा फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशाला, दिल्ली से स्वतंत्र रिपोर्ट प्राप्त की गई, जिससे सदन की शाब्दिक कार्यवाही के साथ यह स्थापित होता है कि सुश्री आतिशी द्वारा आरोपित वक्तव्य वास्तव में सदन के पटल पर दिए गए थे।
माननीय अध्यक्ष ने यह भी कहा कि पंजाब पुलिस के लिए प्राथमिकी दर्ज करने से पूर्व दिल्ली विधानसभा सचिवालय से तथ्यों का सत्यापन करने में कोई बाधा नहीं थी तथा ऐसा न किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह स्पष्ट किया गया कि किसी भी जांच को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया गया है; आपत्ति केवल इस बात पर है कि विधानसभा की कार्यवाही से संबंधित वीडियो क्लिप को बिना पूर्व सत्यापन के 'छेड़छाड़ किया गया' घोषित किया गया। उप-न्यायाधीन (सब ज्यूडिस) होने के आधार पर मामले की जांच न किए जाने संबंधी तर्क को भी विचार विमर्श के बाद अस्वीकार कर दिया गया। माननीय अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि कार्यविधि नियमों के अंतर्गत उप-न्यायाधीन (सब ज्यूडिस) मामलों से संबंधित प्रतिबंध आत्म-नियंत्रित होते हैं, सीमित दायरे में लागू होते हैं तथा विशेषाधिकार से संबंधित मामलों पर लागू नहीं होते।
माननीय अध्यक्ष ने दिल्ली कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा द्वारा प्रस्तुत उस शिकायत पर भी विचार किया, जिसमें विशेषाधिकार हनन तथा संविधान के अनुच्छेद 361A के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। उक्त अनुच्छेद के अनुसार, किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध किसी विधान सभा की कार्यवाही की यथासंभव सत्य रिपोर्ट के प्रकाशन के लिए आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती।
उपरोक्त तथ्यों के मद्देनज़र, विशेषाधिकार समिति को निर्देशित किया गया है कि वह इकबाल सिंह, पुलिस महानिदेशक, पंजाब, पुलिस आयुक्त, जालंधर, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), पंजाब सरकार तथा इस प्रकरण से जुड़े अन्य संबंधित व्यक्तियों के आचरण एवं कार्रवाई की जांच कर नियमों के अनुसार अपनी रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत करे।