Edited By Ramanjot,Updated: 24 Jan, 2026 07:10 PM

दर्द से तुरंत राहत देने वाली पेन किलर दवाएं जैसे NSAIDs (इबुप्रोफेन, डाइक्लोफेनाक, नेप्रोक्सन) और पैरासिटामोल आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती हैं, लेकिन...
नेशनल डेस्क: दर्द से तुरंत राहत देने वाली पेन किलर दवाएं जैसे NSAIDs (इबुप्रोफेन, डाइक्लोफेनाक, नेप्रोक्सन) और पैरासिटामोल आमतौर पर सुरक्षित मानी जाती हैं, लेकिन अगर इन्हें लंबे समय तक या बिना डॉक्टर की सलाह के लिया जाए, तो ये शरीर के सबसे अहम अंग—किडनी और लिवर—को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इन दवाओं का अत्यधिक या गलत इस्तेमाल धीरे-धीरे अंगों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे क्रॉनिक डैमेज, ऑर्गन फेलियर तक का खतरा बढ़ सकता है।
किडनी पर पेन किलर का असर क्यों खतरनाक है?
NSAIDs शरीर में बनने वाले प्रोस्टाग्लैंडिन्स नामक केमिकल्स को रोक देती हैं। ये केमिकल्स किडनी की रक्त नलिकाओं को खुला रखने में मदद करते हैं। जब यह प्रक्रिया बाधित होती है तो किडनी में ब्लड फ्लो कम हो जाता है, फिल्ट्रेशन क्षमता घटती है,समय के साथ एक्यूट किडनी इंजरी, एनाल्जेसिक नेफ्रोपैथी या क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) हो सकती है। पैरासिटामोल सामान्य मात्रा में अपेक्षाकृत सुरक्षित है, लेकिन ओवरडोज या लंबे समय तक सेवन किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।
ज्यादा खतरा किन लोगों में?
बुजुर्ग,हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज के मरीज ,हार्ट डिजीज वाले,और पहले से किडनी की समस्या से जूझ रहे लोग।
लिवर पर कैसे असर डालती हैं दर्द की दवाएं?
लिवर का काम दवाओं को मेटाबॉलाइज करना होता है। पैरासिटामोल की अधिक मात्रा लेने पर लिवर में मौजूद ग्लूटाथियोन खत्म हो जाता है, जिससे लिवर सेल्स को सीधा नुकसान पहुंचता है।
ये परिणाम हो सकते हैं:
- एक्यूट लिवर फेलियर
- लिवर एंजाइम्स का बढ़ना
- ड्रग-इंड्यूस्ड लिवर इंजरी
- फैटी लिवर या सूजन
NSAIDs का असर लिवर पर अपेक्षाकृत कम होता है, लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल से खतरा बढ़ जाता है।
जोखिम ज्यादा किसमें?
- हेपेटाइटिस या सिरोसिस के मरीज
- ज्यादा शराब पीने वाले
- एक साथ कई दवाएं लेने वाले लोग
- किडनी और लिवर खराब होने के शुरुआती संकेत
अक्सर ये लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं, इसलिए इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
किडनी डैमेज के लक्षण
- लगातार थकान और कमजोरी
- पैरों, टखनों या चेहरे पर सूजन
- पेशाब कम होना या झागदार पेशाब
- पेशाब का रंग गहरा या खून जैसा
- कमर या साइड में दर्द, BP बढ़ना
लिवर डैमेज के लक्षण
- भूख न लगना, मतली या उल्टी
- पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में दर्द
- आंखों और त्वचा का पीला पड़ना
- डार्क यूरिन, हल्का स्टूल
- बिना वजह वजन कम होना
कई मामलों में दर्द नहीं होता, लेकिन ब्लड टेस्ट (KFT/LFT) में समस्या पकड़ में आती है।
पेन किलर से होने वाले नुकसान से कैसे बचें?
- बिना डॉक्टर की सलाह पेन किलर न लें, खासकर लंबे समय तक।
- पैरासिटामोल की सुरक्षित डेली लिमिट से ज्यादा न लें।
- NSAIDs को लगातार 10–14 दिन से अधिक न लें।
- दिनभर पर्याप्त पानी पिएं, डिहाइड्रेशन से बचें।
- पहले से किडनी, लिवर, BP या हार्ट की समस्या हो तो डॉक्टर को बताएं।
- नियमित दवा लेने पर KFT और LFT जांच करवाते रहें।
- दर्द के लिए वैकल्पिक तरीके अपनाएं
- योग, फिजियोथेरेपी, एक्सरसाइज, हॉट/कोल्ड पैक
पेन किलर जरूरत पड़ने पर राहत देती हैं, लेकिन लापरवाही से लिया गया सेवन जानलेवा हो सकता है। कोई भी असामान्य लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है—व्यक्तिगत सलाह के लिए मेडिकल एक्सपर्ट से परामर्श जरूरी है।