किडनी खराब होने से पहले शरीर देता है ये गुप्त संकेत, डायबिटीज और बीपी के मरीज भूलकर भी न करें इग्नोर

Edited By Updated: 09 Mar, 2026 04:51 PM

early signs of kidney disease

किडनी की बीमारी एक 'साइलेंट किलर' है, जिसके लक्षण शुरुआती दौर में बहुत हल्के होते है

Kidney Disease Early Signs: आधुनिक जीवनशैली और खान-पान में बदलाव के कारण 'क्रॉनिक किडनी डिजीज' (CKD) एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि किडनी की बीमारियां अक्सर "साइलेंट किलर" की तरह व्यवहार करती हैं, क्योंकि इनके लक्षण तब तक स्पष्ट नहीं होते जब तक कि अंग गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त न हो जाए। शुरुआती संकेतों को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज करना मरीजों के लिए भविष्य में घातक साबित हो रहा है। 

शुरुआती संकेतों की पहचान 

डॉक्टरों के अनुसार, किडनी खराब होने के शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग उन्हें तनाव या बढ़ती उम्र का असर मान लेते हैं। यदि आप नीचे दिए गए लक्षणों को महसूस कर रहे हैं, तो यह आपकी किडनी की पुकार हो सकती है: 

अत्यधिक थकान: बिना किसी भारी काम के भी ऊर्जा की कमी और कमजोरी महसूस होना। 

एडिमा (सूजन): टखनों, पैरों या आंखों के आसपास असामान्य सूजन का दिखाई देना। 

पेशाब में बदलाव: बार-बार पेशाब आना या पेशाब के रंग और मात्रा में अचानक बदलाव। 

हाइपरटेंशन: ब्लड प्रेशर का अचानक बढ़ जाना और दवाओं के बावजूद नियंत्रित न होना। 

दवाइयां और लाइफस्टाइल भी बढ़ा रहे हैं जोखिम 

सिर्फ बीमारियां ही नहीं, बल्कि हमारी कुछ आदतें भी किडनी को सीधे नुकसान पहुंचा रही हैं: 

पेनकिलर्स का ओवरडोज: बिना डॉक्टरी सलाह के दर्द निवारक दवाओं (NSAIDs) का नियमित सेवन। 

पर्यावरणीय कारक: हवा और पानी में मौजूद भारी धातुएं (Heavy Metals) और विषाक्त तत्व। 

धूम्रपान: यह रक्त प्रवाह को धीमा करता है, जिससे किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। 

आनुवंशिकता: पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज जैसी जेनेटिक स्थितियां।  

डायबिटीज और बीपी: किडनी के सबसे बड़े दुश्मन 

आंकड़े बताते हैं कि किडनी फेलियर के अधिकांश मामलों के पीछे डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर मुख्य कारण हैं। 

शुगर का प्रभाव: रक्त में शर्करा की अधिक मात्रा किडनी की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं (फिल्टर) को नष्ट कर देती है। 

दबाव का असर: अनियंत्रित रक्तचाप किडनी की धमनियों को संकुचित कर देता है, जिससे उनकी छानने की क्षमता कम हो जाती है। 

विशेषज्ञ की राय: "यदि आपको 5 साल से अधिक समय से डायबिटीज है, तो आपको साल में कम से कम दो बार किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) जरूर कराना चाहिए।" 


जांच ही है सबसे बड़ा बचाव 

चूंकि यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है, इसलिए नियमित जांच (Screening) ही एकमात्र रास्ता है। साधारण ब्लड टेस्ट (Creatinine) और यूरिन टेस्ट के जरिए शुरुआती चरण में ही इसका पता लगाया जा सकता है। सही समय पर पहचान होने से सही डाइट, दवाओं और लाइफस्टाइल में बदलाव के जरिए डायलिसिस या ट्रांसप्लांट जैसी नौबत को रोका जा सकता है।

 

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!