दुनिया को आतंक की आग में झोंकने वाला पाकिस्तान बना गारंटर, अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर किए हस्ताक्षर

Edited By Updated: 18 Jun, 2026 05:08 PM

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आतंकवाद को लेकर वर्षों से अंतरराष्ट्रीय आलोचना झेलने वाला पाकिस्तान अब अमेरिका-ईरान शांति समझौते का गारंटर बनकर खुद को शांति का दूत साबित करने की कोशिश कर रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ‘इस्लामाबाद एमओयू’ पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे पाकिस्तान की...

International Desk: वर्षों से आतंकवाद और चरमपंथी संगठनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना कर रहे पाकिस्तान ने अब खुद को पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने वाले देश के रूप में पेश करने की कोशिश की है। प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने बृहस्पतिवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुए ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ (Islamabad MoU) पर गारंटर के रूप में हस्ताक्षर कर दिए। यह वही पाकिस्तान है जिस पर भारत सहित कई देशों ने वर्षों से सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने और आतंकवादी संगठनों को संरक्षण देने के आरोप लगाए हैं। ऐसे में अमेरिका-ईरान जैसे बड़े कूटनीतिक समझौते में उसकी मध्यस्थ की भूमिका ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

 

ट्रंप और पेजेश्कियन पहले ही कर चुके हस्ताक्षर
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, इस समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian पहले ही डिजिटल हस्ताक्षर कर चुके हैं। शहबाज शरीफ ने गारंटर के रूप में दस्तावेज को मंजूरी देकर पाकिस्तान को इस समझौते के प्रमुख मध्यस्थों में शामिल कर दिया है।  प्रधानमंत्री कार्यालय ने हस्ताक्षर करते हुए शहबाज की तस्वीरें और वीडियो भी जारी किए, जिनमें उन्हें समझौते के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते देखा जा सकता है।

 

होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का दावा 
शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर दावा किया कि यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू होगा। इसके तहत ईरान तुरंत Strait of Hormuz को फिर से खोलेगा, जबकि अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करेगा।होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र में तनाव कम होना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी राहत की खबर माना जा रहा है।

 

शांति दूत की भूमिका में पाकिस्तान
शहबाज शरीफ ने समझौते को संघर्ष के कूटनीतिक समाधान की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के शीर्ष नेतृत्व द्वारा समझौते पर हस्ताक्षर यह साबित करते हैं कि दोनों पक्ष युद्ध के बजाय बातचीत के रास्ते को प्राथमिकता देना चाहते हैं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान इस समझौते के जरिए अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि को नया रूप देने का प्रयास कर रहा है। आतंकवाद के मुद्दे पर लगातार आलोचना झेलने वाले देश के लिए यह अवसर खुद को एक जिम्मेदार और प्रभावशाली कूटनीतिक खिलाड़ी के रूप में पेश करने का भी है।

 

ट्रंप की तारीफ, सहयोगी देशों को धन्यवाद
शहबाज शरीफ ने राष्ट्रपति ट्रंप की सराहना करते हुए कहा कि उनकी कूटनीतिक पहल और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की नीति ने क्षेत्र को एक बड़े संघर्ष से बचाया है। उन्होंने अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance (जेडी वेंस), Steve Witkoff (स्टीव विटकॉफ), और Jared Kushner (जेरेड कुशनर)की भी प्रशंसा की। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने साथ ही Qatar, Saudi Arabia, Turkey और Egypt के योगदान को भी सराहा। शहबाज शरीफ ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा हुसैनी खामेनेई, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेरी ग़ालिबाफ़ का धन्यवाद किया। उन्होंने पाकिस्तान सेना प्रमुख Asim Munir का भी विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।

 

सबसे बड़ा सवाल
अमेरिका-ईरान समझौते में पाकिस्तान की भूमिका निश्चित रूप से उसके लिए एक कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश की जा रही है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकारों का मानना है कि आतंकवाद और उग्रवाद से जुड़े आरोपों के इतिहास के कारण पाकिस्तान को अभी भी अपनी विश्वसनीयता साबित करनी होगी। यही वजह है कि ‘इस्लामाबाद एमओयू’ के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान वास्तव में क्षेत्रीय शांति का भरोसेमंद संरक्षक बन पाएगा, या फिर यह उसकी वैश्विक छवि सुधारने की एक बड़ी कूटनीतिक कवायद भर है।  

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