Edited By Mansa Devi,Updated: 31 Mar, 2026 01:31 PM

देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और पैनिक बायिंग के बीच पेट्रोल पंप पर फ्रॉड की घटनाओं पर ध्यान देना अब जरूरी हो गया है। अक्सर लोग अपनी कार या बाइक में ईंधन भरवाते समय कर्मचारी के कहने पर सिर्फ मीटर को 0 पर देखकर संतुष्ट हो जाते हैं।
नेशनल डेस्क: देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और पैनिक बायिंग के बीच पेट्रोल पंप पर फ्रॉड की घटनाओं पर ध्यान देना अब जरूरी हो गया है। अक्सर लोग अपनी कार या बाइक में ईंधन भरवाते समय कर्मचारी के कहने पर सिर्फ मीटर को 0 पर देखकर संतुष्ट हो जाते हैं। लेकिन विशेषज्ञ बताते हैं कि असली हेरफेर वहीं से शुरू होता है, जहां ग्राहक ध्यान नहीं देते यानी Density Meter पर।
सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल होते रहते हैं, जिनमें पेट्रोल पंप कर्मचारी फ्यूल की डेंसिटी में बदलाव करके ग्राहकों को ठगते दिखाए गए हैं। मीटर पर 0 दिखने के बावजूद डेंसिटी मीटर पर बदलाव से मिलावटी पेट्रोल या डीजल डाला जा सकता है। इसलिए जब भी फ्यूल भरवाएं, मीटर के साथ-साथ डेंसिटी मीटर की संख्या भी जरूर देखें।
डेंसिटी मीटर क्यों जरूरी है?
Density Meter पेट्रोल या डीजल की शुद्धता और क्वालिटी का पैमाना है। पेट्रोल की डेंसिटी सामान्यत: 720–775 किलोग्राम/क्यूबिक मीटर और डीजल की डेंसिटी 810–845 किलोग्राम/क्यूबिक मीटर के बीच होनी चाहिए। अगर डेंसिटी इस रेंज में है, तो ईंधन सही है, वरना मिलावटी तेल होने का अंदेशा है। डेंसिटी मीटर पर नजर रखने से दो तरह के नुकसान से बचा जा सकता है। सबसे पहले, मिलावटी तेल आपकी खरीदारी को बेकार कर सकता है और आपकी जेब पर असर डाल सकता है। दूसरा, खराब तेल आपके वाहन के इंजन को नुकसान पहुंचा सकता है।
मीटर में भी देखें बदलाव
सिर्फ डेंसिटी मीटर ही नहीं, पेट्रोल पंप का सामान्य मीटर भी ध्यान में रखना जरूरी है। अगर मीटर की शुरुआत 0 से धीरे-धीरे बढ़ती है, जैसे 1, 2, 3-4-5, तो सब ठीक है। लेकिन अगर यह 0 से सीधे 10 या अधिक पर पहुंच जाता है, तो यह धोखाधड़ी का संकेत हो सकता है।
पैनिक बायिंग और फ्रॉड
हाल के समय में अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक तेल संकट गहरा गया है। पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों में कीमतें बढ़ी हैं और भारत में भी पैनिक बायिंग के चलते पंप पर भीड़ देखने को मिली। हालांकि सरकार और तेल कंपनियों ने भरोसा दिया है कि भारत में ईंधन की कमी नहीं है, लेकिन घबराहट में खरीदारी करते समय फ्रॉड के चांस बढ़ जाते हैं।
फ्यूल भरवाते समय Density Meter पर नजर रखना, मीटर की शुरुआत पर ध्यान देना, शक होने पर कर्मचारी से सवाल करना या रिकॉर्डिंग करना और जरूरत पड़ने पर अन्य पंप का विकल्प चुनना महत्वपूर्ण है। छोटी सावधानी अपनाकर आप न केवल अपने पैसे बचा सकते हैं, बल्कि वाहन को भी नुकसान से बचा सकते हैं। पेट्रोल-डीजल भरवाते समय अब सिर्फ मीटर का 0 देखना ही काफी नहीं, डेंसिटी मीटर पर नजर रखना जरूरी है।