Edited By Pardeep,Updated: 22 Jun, 2026 11:52 PM

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में दशकों से जारी माओवादी हिंसा को लेकर सोमवार को कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और कहा कि जो लोग आज संविधान लहरा रहे हैं, तब उनके हाथ कांप रहे थे।
नेशनल डेस्कः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में दशकों से जारी माओवादी हिंसा को लेकर सोमवार को कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और कहा कि जो लोग आज संविधान लहरा रहे हैं, तब उनके हाथ कांप रहे थे।
यहां "रिपब्लिक समिट 2026" को संबोधित करते हुए मोदी ने यह भी कहा कि भारत न केवल तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, बल्कि एक विश्वसनीय और भरोसेमंद वैश्विक शक्ति भी है और देश अगले 1,000 वर्षों का भविष्य गढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकारों ने माओवाद-प्रभावित इलाकों को पिछड़ा इलाका करार दिया था, लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने इन इलाकों को बदलने की चुनौती स्वीकार की, वहां के लोगों को निराशा से बाहर निकलने में मदद की और उनमें तरक्की की उम्मीद जगाई।
मोदी ने कहा कि इस नए नजरिए को ध्यान में रखते हुए उनकी सरकार ने उन इलाकों का नाम बदलकर 'आकांक्षी जिले और प्रखंड' कर दिया है और आज ये आकांक्षी जिले और प्रखंड उन क्षेत्रों की तरक्की को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन इलाकों में आबादी का एक बड़ा हिस्सा गरीबी में रहता था, लेकिन पिछले कुछ सालों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। इस कामयाबी में आकांक्षी जिलों ने अहम भूमिका निभाई है और जो इलाके कभी नक्सलवाद से प्रभावित थे, वहां अब विकास की नई किरणें दिखाई दे रही हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में भी चरमपंथियों ने आदिवासी इलाकों में कोई भी सुविधा स्थापित नहीं होने दी। उन्होंने कहा कि वहां से सरकारी गाड़ी भी नहीं गुजर सकती थी, क्योंकि उस पर गोलियां बरसा दी जाती थीं। मोदी ने कहा कि सरकारें आईं और गईं, पीढ़ियां आईं और गईं, और ऐसा लगा कि हिंसा की यह बदकिस्मती यूं ही बनी रहेगी। उन्होंने कहा, "2004 से 2014 के बीच, माओवादी उग्रवाद के कारण हिंसा की 17,000 से ज्यादा घटनाएं हुईं और लगभग 7,000 लोगों की जान गई। 2014 के बाद, हमने स्थिति को बदलने के लिए 'राष्ट्र प्रथम' के संकल्प के साथ कदम आगे बढ़ाए।"
उन्होंने कहा, "आज देश में माओवादी उग्रवाद अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है। यह इसलिए संभव हो पाया क्योंकि इसके लिए पूर्ण समर्पण की आवश्यकता थी। आज जो लोग संविधान लहरा रहे हैं, उस समय उनके हाथ संविधान दिखाने में भी कांपते थे।" कांग्रेस नेता राहुल गांधी को अलग-अलग मौकों पर संविधान की प्रति लिए हुए देखा गया है, जिसमें 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद सांसद के तौर पर शपथ लेना भी शामिल है।