बंगाल में OBC आरक्षण कटौती पर सियासत तेज, इकरा हसन बोलीं- आरक्षण की हर जगह हो रही लूट

Edited By Updated: 20 May, 2026 09:20 PM

politics intensifies in bengal over the obc reservation cut with iqra hasan say

उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी सांसद इकरा हसन ने पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण घटाकर 7 प्रतिशत करने पर बीजेपी पर हमला बोला है। सपा सांसद इकरा हसन ने कहा, "हर जगह आरक्षण की लूट हो रही है। आज हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भी एक बुकलेट...

नेशनल डेस्क: उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी सांसद इकरा हसन ने पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण घटाकर 7 प्रतिशत करने पर बीजेपी पर हमला बोला है। सपा सांसद इकरा हसन ने कहा, "हर जगह आरक्षण की लूट हो रही है। आज हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भी एक बुकलेट जारी की है जिसमें साफ तौर से दिखाया गया है कि कितनी भर्तियां हैं जिनमें आरक्षण की लूट हुई है। लगातार PDA समाज के लोगों को सुनियोजित तरीके से ठगा जा रहा है।  

आरक्षण प्रणाली को कमजोर कर रही बीजेपी 
अखिलेश यादव ने इसे लेकर भाजपा सरकार पर संवैधानिक आरक्षण प्रणाली को कमजोर करने का आरोप लगाया।  उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लोगों को संविधान के तहत गारंटीकृत अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यादव ने यहां पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए,'आरक्षण की लूट' से संबंधित 'पीडीए ऑडिट' नामक एक दस्तावेज जारी किया और कहा कि रिपोर्ट को अधिक डेटा और तथ्यों के साथ अद्यतन किया जाता रहेगा। 

संवैधानिक प्रावधानों को लागू नहीं कर रही बीजेपी  
उन्होंने कहा, ''पीडीए ऑडिट और आरक्षण की लूट पर इस दस्तावेज में सुधार जारी रहेगा और इसमें अधिक डेटा शामिल किया जाएगा।'' यादव ने जून 2023 में 'पीडीए' शब्द गढ़ा था जिसका उनके अनुसार अभिप्राय है ''पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक''। सपा प्रमुख ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर छात्रों और अभ्यर्थियों को संवैधानिक प्रावधानों को लागू करने के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, तो "यह समझा जाना चाहिए कि सरकार पक्षपाती है।

आरक्षण सुरक्षा सामाजिक न्याय और समानता का जरिया
उन्होंने आरोप लगाया, ''अगर हमें संवैधानिक अधिकारों के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, तो इसका अभिप्राय है कि सरकार पक्षपाती है। और जो पक्षपाती है वह बेवफा भी है। पूर्वाग्रह अपने आप में अन्याय है क्योंकि यह अधिकार छीन लेता है।'' सपा अध्यक्ष ने आरक्षण को सामाजिक न्याय और समानता का जरिया बताया। उन्होंने कहा, ''आरक्षण सुरक्षा है। आरक्षण सामाजिक समन्वय का एक उपकरण और माध्यम भी है।

लेटरल एंट्री पर अखिलेश ने उठाए सवाल 
भाजपा सरकार की बुलडोजर कार्रवाई का जिक्र करते हुए यादव ने कहा, ''अगर भाजपा सरकार बुलडोजर चलाना चाहती है, तो उन्हें असमानता की असमान जमीन को समतल करने और सभी को उनका उचित आरक्षण प्रदान करने के लिए उपयोग करना चाहिए।'' सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि 'पार्श्व प्रवेश' (लेटरल एंट्री) नियुक्तियों जैसे तंत्रों के माध्यम से आरक्षण को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया, ''पार्श्व प्रवेश के जरिए अपनी पसंद के लोगों को पिछले दरवाजे से समायोजित किया जा रहा है ताकि आरक्षण की मांग धीरे-धीरे कमजोर हो जाए।  'लेटरल एंट्री' से तात्पर्य सरकार के बाहर से व्यक्तियों को सीधे मध्य-स्तर और वरिष्ठ स्तर के पदों पर नियुक्त करने की प्रक्रिया से है।

आरक्षित पदों का हो रहा नुकसान 
पुस्तिका में बांदा कृषि विश्वविद्यालय में 2022 में की गई भर्ती का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया कि 15 विज्ञापित पदों में से सात ओबीसी, एससी और एसटी उम्मीदवारों के लिए आरक्षित थे, लेकिन इन श्रेणियों के केवल दो उम्मीदवारों का चयन किया गया, जिसके परिणामस्वरूप पांच आरक्षित पदों का ''नुकसान'' हुआ। पुस्तिका में 2023 प्रवर्तन कांस्टेबल भर्ती पर भी सवाल उठाए गए हैं और दावा किया गया है कि आरक्षण मानदंडों के तहत 239 पद ओबीसी, एससी और एसटी उम्मीदवारों को दिए जाने चाहिए थे, लेकिन केवल 205 ऐसे उम्मीदवारों का चयन किया गया, जिससे 34 आरक्षित पद रिक्त रह गए।

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