Edited By Rohini Oberoi,Updated: 20 Jul, 2026 09:52 AM

कहावत है कि अगर हौसला बुलंद हो और मेहनत सच्ची हो तो किस्मत बदलते देर नहीं लगती। इसे सच कर दिखाया है छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के सुदूर लडुवा गांव की रहने वाली एक साधारण ग्रामीण महिला दिलमती ने। कभी पारंपरिक खेती के भरोसे बमुश्किल अपने परिवार का पेट...
Lakhpati Didi Dilmati : कहावत है कि अगर हौसला बुलंद हो और मेहनत सच्ची हो तो किस्मत बदलते देर नहीं लगती। इसे सच कर दिखाया है छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के सुदूर लडुवा गांव की रहने वाली एक साधारण ग्रामीण महिला दिलमती ने। कभी पारंपरिक खेती के भरोसे बमुश्किल अपने परिवार का पेट पालने वाली दिलमती आज सूअर पालन के एक बेहद सफल व्यवसाय के दम पर हर साल करीब 7 से 8 लाख रुपये की शुद्ध कमाई कर रही हैं।
उनकी यह कामयाबी सिर्फ उनके घर तक सीमित नहीं है बल्कि आज वे अपने पूरे इलाके में 'लखपति दीदी' के नाम से मशहूर हो चुकी हैं और सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। बता दें कि दिलमती के इस सफल बिजनेस मॉडल की शुरुआत बेहद साधारण तरीके से हुई थी। दिलमती गांव के 'मां दुर्गा महिला स्वयं सहायता समूह' (Self Help Group) से जुड़ीं। फिर पारंपरिक खेती से घर का खर्च न चल पाने के कारण उन्होंने कुछ नया करने की ठानी।
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जिसके बाद उन्होंने अपने समूह के माध्यम से 1 लाख रुपये का छोटा सा बिजनेस लोन लिया। इस रकम से वे पड़ोसी राज्य झारखंड गईं और वहां से 10 सूअर खरीदकर अपने घर के पास एक छोटा सा फार्म शुरू किया। शुरुआती हिचकिचाहट के बाद दिलमती का यह नया कारोबार तेजी से आगे बढ़ा और मुनाफे का बड़ा जरिया बन गया। आज उनके फार्म में कई मादा सूअर हैं। हर मादा सूअर एक बार में करीब 9 से 10 बच्चों को जन्म देती है। बाजार में इन बच्चों की मांग काफी अच्छी है और एक बच्चा करीब 5,000 रुपये में आसानी से बिक जाता है।
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सूअर पालन से होने वाली बंपर कमाई को दिलमती ने फिजूलखर्ची में उड़ाने के बजाय दोबारा अपने बिजनेस में निवेश (Re-invest) किया। उन्होंने पशुओं के रहने के लिए पक्के और आधुनिक शेड बनवाए, खेती के लिए नए आधुनिक उपकरण खरीदे और खेतों में पानी की बचत के लिए 'ड्रिप सिंचाई प्रणाली' लगवाई। आज वे जैविक (ऑर्गेनिक) सब्जियों की खेती भी कर रही हैं जिससे उनकी आमदनी के कई रास्ते खुल गए हैं।
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बनीं रोल मॉडल, 15 परिवारों को दिया रोजगार
दिलमती को लखपति बनते देख गांव के ही करीब 10 से 15 अन्य परिवारों ने भी पारंपरिक खेती छोड़कर या उसके साथ-साथ सूअर पालन का काम शुरू कर दिया है। दिलमती अब अपने इलाके की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने, पैसों की नियमित बचत करने और स्वरोजगार के लिए मिलने वाले सरकारी लोन का सही बिजनेस में इस्तेमाल करने की व्यावहारिक ट्रेनिंग और सलाह दे रही हैं।