Bye-Bye Delhi? क्या अब 'इंद्रप्रस्थ' कहलाएगी देश की राजधानी! BJP सांसद ने गृह मंत्री शाह के सामने रखी बड़ी मांग

Edited By Updated: 25 Feb, 2026 12:28 PM

praveen khandelwal urged amit shah to rename delhi as indraprastha

बीते दिन मोदी ने केरल के नाम को केरलम करने की मंजूरी दी थी। अब इसी तर्ज पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का नाम बदलने की मांग भी सामने आई है। चांदनी चौक से भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि दिल्ली का नाम बदलकर 'इंद्रप्रस्थ'...

नेशनल डेस्क: बीते दिन मोदी ने केरल के नाम को केरलम करने की मंजूरी दी थी। अब इसी तर्ज पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का नाम बदलने की मांग भी सामने आई है। चांदनी चौक से भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि दिल्ली का नाम बदलकर 'इंद्रप्रस्थ' कर दिया जाए। इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक औपचारिक पत्र लिखकर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया है।

'इंद्रप्रस्थ' भूमि की प्राचीन और सभ्यतागत पहचान है

सांसद खंडेलवाल का मानना है कि 'दिल्ली' नाम इतिहास के केवल एक सीमित कालखंड को दर्शाता है, जबकि 'इंद्रप्रस्थ' इस भूमि की प्राचीन और सभ्यतागत पहचान है। उन्होंने अपने पत्र में जिक्र किया कि महाभारत काल में पांडवों ने इसी स्थान पर अपनी भव्य राजधानी बसाई थी। उनके अनुसार, नाम में यह बदलाव भारत की सांस्कृतिक जड़ों को फिर से स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

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पुरातत्व विभाग के प्रमाणों का दिया हवाला

अपनी मांग को मजबूती देने के लिए खंडेलवाल ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की खुदाई का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि दिल्ली के 'पुराना किला' परिसर में मिले अवशेष, विशेषकर पेंटेड ग्रे वेयर (PGW) संस्कृति, इस बात की पुष्टि करते हैं कि यहाँ लगभग 1000 ईसा पूर्व से ही मानव बसावट रही है। इन खोजों को अक्सर महाभारत कालीन सभ्यता से जोड़कर देखा जाता है।

नाम बदलने के अलावा दिए महत्वपूर्ण सुझाव

सांसद ने केवल नाम बदलने तक ही सीमित न रहकर कुछ और महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि पुराना किला जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर पांडवों की भव्य प्रतिमाएं लगाई जानी चाहिए। खंडेलवाल ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी पत्र लिखकर मांग की है कि दिल्ली विधानसभा में नाम बदलने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा जाए। उन्होंने तर्क दिया कि दिल्ली के कई संस्थानों और इलाकों के नाम पहले से ही 'इंद्रप्रस्थ' पर आधारित हैं, जिससे साफ है कि जनता के बीच इस नाम की पहले से ही स्वीकार्यता है।

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अन्य शहरों का दिया उदाहरण

पत्र में याद दिलाया गया कि जिस तरह बंबई को मुंबई, मद्रास को चेन्नई और इलाहाबाद को प्रयागराज किया गया, उसी तर्ज पर दिल्ली की ऐतिहासिक पहचान को भी नया विस्तार मिलना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि इतिहासकारों और विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाकर इस प्रस्ताव पर औपचारिक मुहर लगाई जाए।

 

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