Edited By Niyati Bhandari,Updated: 25 Feb, 2026 07:33 AM

Chandra Grahan 2026: धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल को अत्यंत संवेदनशील और प्रभावशाली समय माना जाता है। वर्ष 2026 में फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि, 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण लगेगा। यह इस वर्ष का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण बताया जा...
Chandra Grahan 2026: धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल को अत्यंत संवेदनशील और प्रभावशाली समय माना जाता है। वर्ष 2026 में फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि, 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण लगेगा। यह इस वर्ष का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण बताया जा रहा है, जिसकी कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट रहेगी।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा। चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य होगा।

चंद्र ग्रहण 2026 का समय (भारत में)
ग्रहण प्रारंभ: दोपहर 03:20 बजे
ग्रहण समाप्त: शाम 06:47 बजे
कुल अवधि: 3 घंटे 27 मिनट

सूतक काल कब से लगेगा?
धर्म शास्त्रों के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले प्रारंभ हो जाता है।
सूतक प्रारंभ: सुबह 06:20 बजे
सूतक समाप्त: शाम 06:47 बजे (ग्रहण समाप्ति के साथ)
सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और शुभ कार्यों को स्थगित रखा जाता है।
चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में कुछ विशेष नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है:
मंदिर के कपाट ढंक दें
सूतक शुरू होने से पहले घर के मंदिर को परदे से ढंक दें।
मंत्र जाप करें
ग्रहण के समय अपने इष्ट देव का नाम जपें।
ॐ नमः शिवाय
ॐ चंद्राय नमः
महामृत्युंजय मंत्र
मंत्र जाप से नकारात्मक प्रभाव कम होता है।
तुलसी दल का प्रयोग
सूतक लगने से पहले बने हुए भोजन में तुलसी के पत्ते डाल दें, जिससे ग्रहण के बाद भोजन ग्रहण किया जा सके।
स्नान और दान
ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर दान-पुण्य करें। वस्त्र, अन्न या दक्षिणा का दान विशेष फलदायी माना जाता है।
ब्रह्मचर्य का पालन
ग्रहण काल में ब्रह्मचर्य और संयम का विशेष महत्व बताया गया है।
चंद्र ग्रहण के दौरान क्या न करें?
धर्म शास्त्रों में ग्रहण काल के दौरान कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी गई है:
पूजा-पाठ न करें
सूतक काल में नियमित पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श या आरती नहीं करनी चाहिए।
भोजन न बनाएं और न खाएं
ग्रहण और सूतक काल में भोजन पकाना और खाना वर्जित माना गया है।
बाहर न निकलें
विशेषकर ग्रहण के दौरान घर के भीतर ही रहें।
नंगी आंखों से ग्रहण न देखें
आंखों की सुरक्षा के बिना ग्रहण देखना हानिकारक हो सकता है।
गर्भवती महिलाएं सावधान रहें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल में बाहर नहीं निकलना चाहिए और धारदार वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
सोने से बचें
सूतक काल में बिस्तर पर लेटना या सोना उचित नहीं माना गया है।

ज्योतिषीय प्रभाव
चूंकि यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में लग रहा है, इसलिए सिंह राशि के जातकों पर इसका विशेष प्रभाव देखने को मिल सकता है। ऐसे जातकों को मानसिक शांति बनाए रखने और मंत्र जाप करने की सलाह दी जाती है।
Chandra Grahan 2026 धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण घटना है। 3 मार्च 2026 को लगने वाला यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य होगा। ग्रहण काल में संयम, मंत्र जाप और दान का विशेष महत्व है। सही नियमों का पालन करने से नकारात्मक प्रभाव कम किए जा सकते हैं और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। ग्रहण के बाद स्नान और दान अवश्य करें।
