Edited By Radhika,Updated: 21 Feb, 2026 02:19 PM

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने मोदी सरकार से मांग की है कि अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा Tariff पर आए हालिया फैसले के बाद भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को तुरंत रोका जाए। रमेश ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी ने राजनीतिक लाभ और ध्यान भटकाने...
नेशनल डेस्क: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने मोदी सरकार से मांग की है कि अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा Tariff पर आए हालिया फैसले के बाद भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को तुरंत रोका जाए। रमेश ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी ने राजनीतिक लाभ और ध्यान भटकाने के लिए जल्दबाजी में यह समझौता किया, जिससे भारतीय किसानों के हितों को नुकसान पहुँच सकता है।
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जयराम ने कहा- समझौते पर फिर से हो बातचीत
संवाददाताओं को संबोधित करते हुए जयराम रमेश ने कहा, "अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखते हुए मोदी सरकार को भारत-अमेरिका व्यापार ढांचे को तुरंत 'होल्ड' पर डाल देना चाहिए। सरकार को संयुक्त बयान के प्रावधानों का उपयोग करना चाहिए और कृषि क्षेत्र में आयात के उदारीकरण को समाप्त करने के लिए इस सौदे पर फिर से बातचीत करनी चाहिए।"

प्रधानमंत्री पर 'हताशा' और 'सरेंडर' का आरोप
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री मोदी की टाइमिंग पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि 2 फरवरी 2026 को जिस हड़बड़ी में व्यापार समझौते की घोषणा की गई, वह केवल लोकसभा में उपजे किसी राजनीतिक दबाव से ध्यान भटकाने की एक कोशिश थी।
उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, "प्रधानमंत्री मोदी को ऐसी क्या मजबूरी थी कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से 2 फरवरी की रात को ही इस डील की घोषणा करवाई? उस दोपहर लोकसभा में ऐसा क्या हुआ था जिसने मोदी जी को इतना हताश कर दिया कि उन्हें व्हाइट हाउस में अपने 'मित्र' से मदद मांगनी पड़ी?"

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला और भारत पर असर
यह विवाद 2 फरवरी को शुरु हुआ, जब भारत अमेरिका को होने वाले निर्यात पर टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने पर सहमत हुआ था। हालांकि, बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की 'रेसिप्रोकल टैरिफ' नीति को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि कानून राष्ट्रपति को एकतरफा रूप से व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता।
जयराम रमेश का तर्क है कि अगर सरकार अमेरिकी अदालत के फैसले का 18 दिन और इंतजार कर लेती, तो भारतीय किसानों और राष्ट्रीय हितों की बेहतर रक्षा की जा सकती थी। उन्होंने इस समझौते को भारत के लिए एक 'कठिन परीक्षा' (Ordeal) और प्रधानमंत्री का 'आत्मसमर्पण' करार दिया।