जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई में भूमिका को लेकर फिर उठे सवाल, शीर्ष कोर्ट में अर्जी

Edited By Updated: 25 Aug, 2026 01:49 PM

questions raised again regarding the role played during the action taken

जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को फिर सुनवाई हुई।

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को फिर सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में 20 जुलाई के विरोध-प्रदर्शन के दौरान ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग के आरोपों की स्वतंत्र जांच के लिए बनाई गई पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी को अपनी जांच जारी रखने दी जानी चाहिए। इस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने कमेटी के पुनर्गठन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पुलिस के कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की कथित भूमिका की व्यापक जांच की मांग की थी।

अर्जी को जल्द लिस्ट करने की मांग

सीनियर वकील गोपाल शंकरनारायणन ने भारत के मुख्य न्यायाधीश के सामने यह मामला उठाया। उन्होंने याचिकाकर्ताओं की उस अर्ज़ी को जल्द लिस्ट करने की मांग की, जिसमें कमेटी के पुनर्गठन की अपील की गई थी। CJI ने कहा कि अर्ज़ी को लिस्ट किया जाएगा। CJI ने कहा, "जो भी काम करेगा, वह इस कोर्ट की सीधी निगरानी में काम करेगा। हमने इस मामले का निपटारा नहीं किया है और हम हर चीज़ पर नज़र रखेंगे।"  कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से यह भी कहा कि वे कमेटी को अपना काम शुरू करने दें और जांच आगे बढ़ने के साथ-साथ अपनी कोई भी चिंता कोर्ट के सामने रखें।

अर्जी का विरोध किया गया

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस अर्ज़ी का विरोध किया। उन्होंने इसे "शरारतपूर्ण" बताया और कमेटी को फिर से बनाने की याचिकाकर्ताओं की मांग पर आपत्ति जताई। जब शंकरनारायणन ने कहा कि याचिकाकर्ता सिर्फ़ अर्ज़ी को लिस्ट कराने की मांग कर रहे थे, तो मेहता ने बताया कि इसमें उन जजों के नाम भी शामिल थे जिन्हें याचिकाकर्ता पैनल में चाहते थे, साथ ही कुछ मंत्रियों के ख़िलाफ़ जांच की मांग भी की गई थी।

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