AI, Data और Indo-US Trade Deal पर राहुल का वार, बोले – लाखों नौकरियां दांव पर

Edited By Updated: 11 Feb, 2026 10:19 PM

rahul gandhi raises alarm over ai impact and india s data sovereignty

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि एआई एक ओर नए अवसर पैदा कर सकती है, तो दूसरी ओर रोजगार के लिए गंभीर चुनौती भी बन सकती है।

नेशनल डेस्क: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि एआई एक ओर नए अवसर पैदा कर सकती है, तो दूसरी ओर रोजगार के लिए गंभीर चुनौती भी बन सकती है।

उन्होंने चेतावनी दी कि भारत का आईटी और सर्विस सेक्टर, जो अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, एआई से सबसे अधिक प्रभावित हो सकता है। यदि समय रहते नीतिगत तैयारी नहीं की गई तो बड़ी संख्या में सॉफ्टवेयर इंजीनियर और तकनीकी पेशेवरों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।

‘डेटा है एआई का पेट्रोल’

राहुल गांधी ने डेटा को एआई युग की सबसे अहम पूंजी बताया। उनके अनुसार, भारत की 1.4 अरब आबादी से उत्पन्न होने वाला विशाल डेटा देश की सबसे बड़ी ताकत है।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में प्रस्तावित एआई समिट भारत के लिए वैश्विक नेतृत्व दिखाने का अवसर हो सकता है। उनका तर्क था कि भारत को अपने डेटा संसाधनों का उपयोग अपनी शर्तों पर करना चाहिए, ताकि वह वैश्विक एआई इकोसिस्टम में मजबूत भूमिका निभा सके।

इंडो-यूएस ट्रेड डील पर सवाल

राहुल गांधी ने हालिया भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार ढांचे (Indo-US Interim Trade Framework) पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि डिजिटल ट्रेड से जुड़े प्रावधानों के कारण भारत की डेटा संप्रभुता (Data Sovereignty) प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने कहा कि बड़ी वैश्विक टेक कंपनियां पहले से ही भारतीय यूजर्स के डेटा पर व्यापक नियंत्रण रखती हैं। ऐसे में यदि डेटा लोकल स्टोरेज, एल्गोरिदम पारदर्शिता और डिजिटल टैक्स जैसे मुद्दों पर भारत का रुख कमजोर पड़ता है, तो इसका असर देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

आईटी सेक्टर और युवाओं का भविष्य

राहुल ने जोर देकर कहा कि भारत को अपने आईटी सेक्टर और युवाओं के हितों की रक्षा करनी होगी। एआई और डिजिटल ट्रेड से जुड़े फैसले लंबे समय में रोजगार, नवाचार और कराधान प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में राष्ट्रीय हित और डेटा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

संसद से सियासत तक

यह बयान ऐसे समय आया है जब संसद में बजट पर चर्चा चल रही है और डिजिटल अर्थव्यवस्था, डेटा फ्लो तथा टैरिफ जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस का केंद्र बने हुए हैं। एआई और डेटा नीति को लेकर आने वाले दिनों में सियासी चर्चा और तेज हो सकती है।

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