डीपफेक और AI कंटेंट पर केंद्र सरकार की बड़ी कार्रवाई, सोशल मीडिया के लिए सख्त नियम लागू

Edited By Updated: 10 Feb, 2026 09:51 PM

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डीपफेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बने फर्जी कंटेंट के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए नए कड़े नियम लागू करने का फैसला किया है।

नेशनल डेस्क: डीपफेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बने फर्जी कंटेंट के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए नए कड़े नियम लागू करने का फैसला किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Amendment Rules, 2026 को अधिसूचित कर दिया है, जो 20 फरवरी 2026 से प्रभावी होंगे।

सरकार ने आईटी रूल्स 2021 में संशोधन करते हुए पहली बार AI-जनरेटेड और सिंथेटिक कंटेंट की स्पष्ट कानूनी परिभाषा तय की है। इसके तहत ऐसी ऑडियो, वीडियो या ऑडियो-विजुअल सामग्री शामिल होगी, जिसे कंप्यूटर, एल्गोरिदम या AI तकनीक से बनाया या बदला गया हो और जो किसी वास्तविक व्यक्ति या घटना जैसी दिखे, लेकिन असल में नकली हो।

अब क्या बदल जाएगा? जानिए नए नियमों की बड़ी बातें

नए नियमों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही काफी बढ़ा दी गई है। अब किसी सरकारी एजेंसी या अदालत द्वारा चिन्हित अवैध डीपफेक या AI कंटेंट को 3 घंटे के भीतर हटाना या ब्लॉक करना अनिवार्य होगा। पहले इसके लिए 36 घंटे का समय मिलता था। वहीं, गैर-सहमति से बनाई गई आपत्तिजनक या निजी तस्वीरों के मामलों में यह समयसीमा और कम रखी जा सकती है।

इसके अलावा, सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म्स जैसे एक्स (Twitter), इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब को AI-जनरेटेड या सिंथेटिक कंटेंट पर साफ और स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा। जहां संभव होगा, वहां कंटेंट में स्थायी मेटाडेटा या यूनिक डिजिटल पहचान भी जोड़ी जाएगी, जिसे बाद में हटाया या छिपाया नहीं जा सकेगा।

यूजर्स पर भी बढ़ी जिम्मेदारी

नए नियमों के अनुसार, यूजर्स को कंटेंट अपलोड करते समय यह बताना होगा कि सामग्री AI से बनाई गई है या उसमें बदलाव किया गया है। गलत जानकारी देने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) या POCSO जैसे कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई हो सकती है।

हालांकि सरकार ने यह भी साफ किया है कि सामान्य एडिटिंग, ग्राफिक्स डिजाइन, शैक्षणिक उद्देश्यों या अच्छे इरादे से किए गए क्रिएटिव काम को इस सख्त परिभाषा के दायरे से बाहर रखा गया है।

शिकायत निवारण और प्लेटफॉर्म्स की नई जिम्मेदारी

संशोधित नियमों में शिकायत निवारण प्रक्रिया को भी तेज किया गया है। प्लेटफॉर्म्स को अब AI कंटेंट डिटेक्शन टूल्स का इस्तेमाल करना होगा, यूजर्स को हर तीन महीने में नियमों की जानकारी देनी होगी और अवैध सिंथेटिक कंटेंट को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाने होंगे।

सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य डीपफेक के जरिए फैलने वाली फेक न्यूज, यौन शोषण और गलत सूचना पर रोक लगाना है, साथ ही इनोवेशन और यूजर सेफ्टी के बीच संतुलन बनाए रखना भी प्राथमिकता है। नियमों का पालन न करने पर प्लेटफॉर्म्स को सेफ हार्बर का लाभ भी गंवाना पड़ सकता है।

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