Ram Navami 2026: इस साल दो दिन मनाई जाएगी राम नवमी! जानें गृहस्थ लोग किस दिन करें श्रीराम की पूजा?

Edited By Updated: 09 Mar, 2026 12:49 PM

ram navami 26 or 27 march see time and date of worship of ramlala

गृहस्थों के लिए पूजा का मुख्य मुहूर्त सुबह 11:13 से दोपहर 01:41 तक रहेगा। वहीं, वैष्णव संप्रदाय 27 मार्च को यह पर्व मनाएगा। भक्त इस दिन रामचरितमानस का पाठ और भजन-कीर्तन कर प्रभु की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

Ram Navami 2026: चैत्र नवरात्रि के समापन और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक 'राम नवमी' को लेकर इस साल श्रद्धालुओं के बीच तिथियों को लेकर कुछ असमंजस की स्थिति है। पंचांग की गणना के अनुसार, साल 2026 में राम नवमी का पर्व दो दिन (26 और 27 मार्च) मनाया जाएगा। जहां गृहस्थ जीवन वाले जातक उदयकालीन तिथि और मध्याह्न काल के संयोग को प्राथमिकता देंगे, वहीं वैष्णव संप्रदाय के अनुयायी अगले दिन उत्सव मनाएंगे। 

आइए जानते हैं कि शास्त्रों के अनुसार किस दिन राम लला की पूजा करना सबसे फलदायी होगा और क्या है इस वर्ष का सटीक विजय मुहूर्त। 

तिथि और शुभ मुहूर्त: कब करें पूजा?

पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल नवमी तिथि का प्रारंभ और समापन का समय इस प्रकार है:

विवरण

समय और तिथि

नवमी तिथि का प्रारंभ 26 मार्च 2026, सुबह 11:38 बजे से
नवमी तिथि का समापन 27 मार्च 2026, सुबह 10:06 बजे तक
 
श्रीराम पूजा का मुख्य मुहूर्त (26 मार्च)

सुबह 11:13 से दोपहर 01:41 तक

वैष्णव राम नवमी (27 मार्च)

दोपहर 12:27 बजे (विशेष पूजा) 

शास्त्रों का मत: 26 मार्च को क्यों मनाएं राम नवमी? 
शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है— "मध्याह्ने यदा नवमी तदा रामजन्मोत्सवः"। अर्थात, जिस दिन मध्याह्न काल (दोपहर के समय) में नवमी तिथि व्याप्त हो, उसी दिन भगवान राम का जन्मोत्सव मनाना शास्त्रसम्मत है। 26 मार्च को दोपहर के समय नवमी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए अधिकांश गृहस्थ श्रद्धालु इसी दिन व्रत और पूजन करेंगे। 

पूजा विधि: ऐसे करें प्रभु को प्रसन्न 

राम नवमी के दिन दोपहर 12 बजे का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। पूजा के लिए इन चरणों का पालन करें: 

संकल्प: सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। 

अभिषेक: प्रभु श्री राम की प्रतिमा को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं। 

श्रृंगार: भगवान को पीतांबर, चंदन, पुष्प और विशेष रूप से तुलसी दल अर्पित करें। 

जन्मोत्सव: ठीक दोपहर 12 बजे शंख और घंटों की ध्वनि के साथ "जय श्रीराम" का जयघोष करें।

पाठ: इस समय रामचरितमानस या वाल्मीकि रामायण के बालकांड का पाठ करना अत्यंत शुभ होता है।

आरती और भोग: पंचमेवा या केसरिया भात का भोग लगाएं और कपूर से आरती करें।
 

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