भारत-रूस के बीच होने जा रही सबसे बड़ी ऐतिहासिक एयरक्राफ्ट डील, बोइंग-एयरबस को मिलेगी कड़ी चुनौती

Edited By Updated: 04 Jun, 2026 06:42 PM

russia india negotiating the joint production of 200 ilyushin and yakolev

भारत और रूस के बीच नागरिक विमानन क्षेत्र में एक बड़ी डील की संभावना बनती दिख रही है। रूसी विमान निर्माता UAC ने संकेत दिया है कि भारतीय एयरलाइंस करीब 200 SJ-100 और Il-114-300 विमानों में रुचि दिखा रही हैं। यह सौदा भारत के लिए एयरबस और बोइंग का...

International Desk: भारत और रूस के बीच नागरिक विमानन क्षेत्र में एक ऐतिहासिक समझौते की संभावना सामने आई है। रूस की सरकारी विमान निर्माण कंपनी United Aircraft Corporation (UAC) के प्रमुख वादिम बादेखा (Vadim Badekha) ने संकेत दिया है कि भारतीय एयरलाइंस रूस के आधुनिक यात्री विमानों Sukhoi SJ-100 और Ilyushin Il-114-300 में गंभीर रुचि दिखा रही हैं।

 

200 विमानों की खरीद की चर्चा
रिपोर्टों के अनुसार भारतीय एयरलाइंस लगभग 200 रूसी विमानों की संभावित खरीद पर विचार कर सकती हैं। यदि यह सौदा होता है तो यह भारत और रूस के बीच नागरिक विमानन क्षेत्र की सबसे बड़ी डीलों में से एक होगी। यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है जब भारतीय एयरलाइंस को नए विमानों की डिलीवरी के लिए Boeing और Airbus से लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

 

क्या हैं SJ-100 और Il-114-300 की खासियतें?
 

  • SJ-100 सौ सीट क्षमता वाला आधुनिक क्षेत्रीय जेट विमान।
  • रूस द्वारा विकसित नवीनतम नागरिक विमान।
  • घरेलू और क्षेत्रीय मार्गों के लिए उपयुक्त।
  • पुराने विदेशी पुर्जों की जगह रूसी तकनीक का अधिक उपयोग।
     

 

  • Il-114-300 टर्बोप्रॉप यात्री विमान।
  • छोटे शहरों और कम विकसित हवाई अड्डों के लिए उपयुक्त।
  • भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
  • कम दूरी के मार्गों पर ईंधन दक्षता बेहतर।
  • भारत के लिए क्यों अहम है यह सौदा?

 

भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में से एक है। आने वाले वर्षों में भारतीय एयरलाइंस को सैकड़ों नए विमानों की जरूरत होगी। रूस के साथ संभावित साझेदारी से विमान आपूर्ति के नए स्रोत खुल सकते हैं। एयरबस और बोइंग पर निर्भरता कम हो सकती है। प्रतिस्पर्धा बढ़ने से बेहतर कीमतें मिल सकती हैं।
भारत-रूस रणनीतिक संबंध और मजबूत हो सकते हैं। फिलहाल किसी आधिकारिक खरीद समझौते की घोषणा नहीं हुई है। रूस की ओर से केवल यह संकेत दिया गया है कि भारतीय पक्ष इन विमानों में रुचि रखता है। अंतिम निर्णय एयरलाइंस, नियामकीय मंजूरी और व्यावसायिक शर्तों पर निर्भर करेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि रूस भारतीय बाजार में सफलतापूर्वक प्रवेश करता है तो यह वैश्विक विमानन उद्योग में एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा। हालांकि रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स, प्रमाणन और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों जैसे मुद्दों पर भी ध्यान देना होगा। 

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