Edited By Ramkesh,Updated: 09 Jul, 2026 02:55 PM

महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय नई चर्चा शुरू हो गई, जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के संस्थापक शरद पवार विधान भवन में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय पहुंचे और वहीं अपनी पार्टी की बैठक की। इस दौरान एकनाथ शिंदे भी कैबिनेट बैठक...
नेशनल डेस्क: महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय नई चर्चा शुरू हो गई, जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के संस्थापक शरद पवार विधान भवन में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय पहुंचे और वहीं अपनी पार्टी की बैठक की। इस दौरान एकनाथ शिंदे भी कैबिनेट बैठक छोड़कर शरद पवार के स्वागत के लिए उनके कार्यालय पहुंचे। इस घटनाक्रम पर शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के सांसद संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
महाराष्ट्र की राजनीति में विश्वासघात किया
संजय राउत ने कहा कि शरद पवार देश के वरिष्ठ और सम्मानित नेता हैं, लेकिन जिस व्यक्ति ने "धोखे और राजनीतिक विश्वासघात" के जरिए महाराष्ट्र की राजनीति को प्रभावित किया, उसके कार्यालय में जाकर बैठक करना उचित नहीं था। उन्होंने कहा कि विधान भवन में बैठकों के लिए कई अन्य स्थान उपलब्ध थे। राष्ट्रवादी भवन और शिवसेना भवन भी पास ही मौजूद हैं, ऐसे में शिंदे के कार्यालय को चुनना गलत संदेश देता है।
'इससे MVA की छवि को नुकसान'
राउत ने कहा कि अगर शिवसेना के नेता अजित पवार के कार्यालय में जाकर बैठक करते, तो यह माना जाता कि वे महाविकास अघाड़ी (MVA) की विचारधारा से हट रहे हैं। इसलिए गठबंधन के सभी सहयोगी दलों को राजनीतिक मर्यादा और साझा सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। उनके मुताबिक, इस घटनाक्रम से शरद पवार गुट की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ सकते हैं।
महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर भी उठाए सवाल
राउत ने बताया कि शरद पवार विधान भवन महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद से जुड़ी बैठक में शामिल होने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा वर्षों से लंबित है और शिवसेना इस आंदोलन का अहम हिस्सा रही है। उन्होंने सवाल किया कि मुख्यमंत्री ने इस बैठक में किन-किन नेताओं को बुलाया और बैठक में क्या निर्णय लिए गए, इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।
'NDA में जाने पर नहीं है कोई शक'
संजय राउत ने स्पष्ट किया कि उन्हें शरद पवार की विचारधारा पर कोई संदेह नहीं है और उन्हें नहीं लगता कि वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होंगे। हालांकि, उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे के कार्यालय में बैठक करना अनावश्यक था और इससे शिवसेना कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत हुई हैं।
'गद्दारों को सम्मान देना गलत संदेश'
राउत ने कहा कि यदि राजनीतिक दल उन नेताओं को सम्मान देंगे, जिन्हें वे पहले विश्वासघाती बताते रहे हैं, तो फिर उनके खिलाफ अदालतों में लड़ाई लड़ने का नैतिक आधार कमजोर पड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता के बीच इससे गलत संदेश जाता है और गठबंधन की राजनीति पर भी सवाल खड़े होते हैं।