Edited By Rohini Oberoi,Updated: 02 Aug, 2026 11:43 AM

भारत के दूरदराज और दुर्गम इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने के लिए 'सैटेलाइट इंटरनेट' को सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति माना जा रहा है। लंबे समय के इंतजार के बाद अब देश में इसके व्यावसायिक स्तर पर लॉन्च होने की संभावनाएं बेहद तेज हो गई हैं। आवश्यक...
नई दिल्ली : भारत के दूरदराज और दुर्गम इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने के लिए 'सैटेलाइट इंटरनेट' को सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति माना जा रहा है। लंबे समय के इंतजार के बाद अब देश में इसके व्यावसायिक स्तर पर लॉन्च होने की संभावनाएं बेहद तेज हो गई हैं। आवश्यक सरकारी मंजूरियां, प्रशासनिक स्पेक्ट्रम आवंटन और तकनीकी तैयारियां पूरी होते ही आने वाले महीनों में यह सेवा आम उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध हो सकती है।
बता दें कि पारंपरिक इंटरनेट के लिए फाइबर केबल या मोबाइल टावरों की आवश्यकता होती है लेकिन सैटेलाइट इंटरनेट सीधे पृथ्वी की निचली कक्षा में तैनात उपग्रहों से कनेक्ट होता है। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पहाड़ों, द्वीपों, सीमावर्ती इलाकों और दूरदराज के गांवों में भी निर्बाध कनेक्टिविटी दे सकती है जहां केबल बिछाना या टावर लगाना काफी मुश्किल और खर्चीला होता है।
भारत में इस क्षेत्र में कई दिग्गज वैश्विक और घरेलू कंपनियां अपनी सेवाएं शुरू करने की तैयारी में हैं। रिलायंस जियो, एयरटेल समर्थित वनवेब और एलन मस्क की स्टारलिंक जैसी कंपनियों को आवश्यक सरकारी मंजूरियां मिल चुकी हैं। वहीं ई-कॉमर्स दिग्गज अमेजन भी अपने 'प्रोजेक्ट कुइपर' के जरिए 2027-28 तक भारतीय बाजार में उतरने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
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जानकारी के लिए बता दें कि परियोजना में देरी का मुख्य कारण स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर टेलीकॉम कंपनियों के बीच मतभेद था। रिलायंस जियो चाहती थी कि स्पेक्ट्रम की नीलामी हो जबकि स्टारलिंक प्रशासनिक आवंटन की मांग कर रही थी। अंततः केंद्र सरकार ने स्पेक्ट्रम को प्रशासनिक आधार पर आवंटित करने का फैसला किया जिससे कंपनियों के लिए सेवाएं शुरू करने का रास्ता साफ हो गया।

बता दें कि आम उपभोक्ताओं को ध्यान में रखते हुए जियो ₹500 से ₹1,000 प्रति माह के किफायती प्लान ला सकती है। हर घर में डिश लगाने के बजाय कंपनी साझा सैटेलाइट गेटवे और अपने एयरफाइबर नेटवर्क के जरिए पूरे गांव तक इंटरनेट पहुंचाने की योजना बना रही है।
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मस्क की स्टरलिंक कंपनी शुरुआती चरण में दूरदराज और प्रीमियम ग्राहकों को टारगेट करेगी। इसके लिए उपभोक्ताओं को ₹30,000 से ₹34,000 तक का रिसीवर हार्डवेयर खरीदना पड़ सकता है जबकि मासिक अनलिमिटेड प्लान ₹3,000 से ₹4,200 के बीच रहने का अनुमान है।

एयरटेल समर्थित वनवेब का प्राथमिक फोकस आम घरेलू ग्राहकों के बजाय कॉर्पोरेट घरानों, सरकारी विभागों, रक्षा क्षेत्र, एविएशन (विमानन), शिपिंग और बैंकिंग सेक्टर पर रहेगा। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा (Competition) और ग्राहकों की संख्या बढ़ने के साथ आने वाले समय में इसके डेटा प्लान और उपकरणों की कीमतों में भारी कमी आएगी।