Why Market Down today: औंधे मुंह गिरा शेयर बाजार, अचानक आई बड़ी गिरावट, जानें कारण?

Edited By Updated: 15 Sep, 2026 06:05 PM

stock market takes a nosedive sudden sharp decline

मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार लाल निशान पर कारोबार करता रहा। गिरावट का असर सिर्फ कुछ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापक बाजार में भी दबाव दिखाई दिया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 777.94 अंक टूटकर 74,003.82 पर बंद हुआ और

मुंबईः कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख के बीच घरेलू शेयर बाजार मंगलवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 778 अंक टूटकर तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 279 अंक गिरकर पांच महीने के निचले स्तर पर बंद हुआ। बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 777.94 अंक यानी 1.04 प्रतिशत की बड़ी गिरावट के साथ 74,003.82 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 279.50 अंक यानी 1.19 प्रतिशत गिरकर 23,118.60 अंक पर बंद हुआ। यह छह अप्रैल, 2026 के बाद निफ्टी का सबसे निचला बंद स्तर है।

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर में करीब छह प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), टाइटन, बजाज फिनसर्व, अडानी पोर्ट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और भारतीय स्टेट बैंक के शेयर भी नुकसान में रहे।

दूसरी तरफ, एचसीएल टेक्नोलॉजीज 3.98 प्रतिशत, इन्फोसिस 3.64 प्रतिशत, टेक महिंद्रा 2.31 प्रतिशत, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) 2.18 प्रतिशत और एचडीएफसी बैंक 1.27 प्रतिशत चढ़े। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 1.89 प्रतिशत बढ़कर 107.7 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

शेयर बाजार में गिरावट की बड़ी वजहें....

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 

अमेरिका के 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 5 प्रतिशत पर पहुंच गई। अक्टूबर 2023 के बाद पहली बार यील्ड ने इस महत्वपूर्ण स्तर को छुआ है। इसका सीधा असर भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट पर पड़ता है। विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बेचकर अपना पैसा अमेरिका ले जा सकते हैं। विदेशी पैसा बाहर जाने पर शेयर बाजार के साथ रुपए पर भी दबाव बढ़ सकता है।

क्रूड ऑयल ने बढ़ाई चिंता

बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से आया। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने की आशंका के बीच ब्रेंट क्रूड करीब 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। भारत अपनी तेल जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगा क्रूड इम्पोर्ट बिल बढ़ाने के साथ रुपए और महंगाई पर दबाव डाल सकता है।

महंगाई और ब्याज दरों का डर

अमेरिकी फेड की तरफ से रेट हाइक की संभावना करीब 94 फीसदी हो गई है। भारत में भी अगस्त की रिटेल महंगाई 4.82 फीसदी पहुंचने से आरबीआई द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की आशंका मजबूत हुई है।

रुपए में गिरावट

डॉलर के मुकाबले रुपया 95.80 के आसपास पहुंच गया। इससे तेल और विदेशी सामान खरीदना महंगा होगा।
 

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