Edited By jyoti choudhary,Updated: 15 Sep, 2026 03:32 PM

मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार लाल निशान पर कारोबार करता रहा। गिरावट का असर सिर्फ कुछ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापक बाजार में भी दबाव दिखाई दिया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 777.94 अंक टूटकर 74,003.82 पर बंद हुआ और
मुंबईः मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार लाल निशान पर कारोबार करता रहा। गिरावट का असर सिर्फ कुछ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापक बाजार में भी दबाव दिखाई दिया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 777.94 अंक टूटकर 74,003.82 पर बंद हुआ और निफ्टी में भी 279.50 अंक की गिरावट रही, ये 23,118.60 के स्तर पर बंद हुआ। बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप घटने से निवेशकों की संपत्ति करीब ₹7 लाख करोड़ कम हो गई।
चौतरफा बिकवाली का दबाव
बीएसई पर करीब 2,918 शेयर गिरावट में रहे, जबकि सिर्फ 1,124 शेयरों में तेजी दिखी। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी दबाव में रहे। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में बिकवाली ने सेंसेक्स और निफ्टी की गिरावट को और बढ़ाया। ICICI Bank, Bajaj Finance, Bajaj Finserv, Kotak Mahindra Bank और SBI जैसे शेयरों में कमजोरी रही। वहीं, BEL करीब 4% टूटकर निफ्टी का सबसे कमजोर शेयर रहा।
शेयर बाजार में गिरावट की बड़ी वजहें....
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड
अमेरिका के 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 5 प्रतिशत पर पहुंच गई। अक्टूबर 2023 के बाद पहली बार यील्ड ने इस महत्वपूर्ण स्तर को छुआ है। इसका सीधा असर भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट पर पड़ता है। विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बेचकर अपना पैसा अमेरिका ले जा सकते हैं। विदेशी पैसा बाहर जाने पर शेयर बाजार के साथ रुपए पर भी दबाव बढ़ सकता है।
क्रूड ऑयल ने बढ़ाई चिंता
बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से आया। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने की आशंका के बीच ब्रेंट क्रूड करीब 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। भारत अपनी तेल जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगा क्रूड इम्पोर्ट बिल बढ़ाने के साथ रुपए और महंगाई पर दबाव डाल सकता है।
महंगाई और ब्याज दरों का डर
अमेरिकी फेड की तरफ से रेट हाइक की संभावना करीब 94 फीसदी हो गई है। भारत में भी अगस्त की रिटेल महंगाई 4.82 फीसदी पहुंचने से आरबीआई द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की आशंका मजबूत हुई है।
रुपए में गिरावट
डॉलर के मुकाबले रुपया 95.80 के आसपास पहुंच गया। इससे तेल और विदेशी सामान खरीदना महंगा होगा।