Edited By Rohini Oberoi,Updated: 31 Mar, 2026 11:27 AM

केंद्र सरकार ने इंटरनेट की दुनिया में सक्रिय बड़े खिलाड़ियों पर शिकंजा कसने के लिए 'IT नियम 2021' में बड़े और सख्त बदलाव किए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी इन नए प्रावधानों ने साफ कर दिया है कि अब फेसबुक, इंस्टाग्राम,...
Digital Strike Social Media : केंद्र सरकार ने इंटरनेट की दुनिया में सक्रिय बड़े खिलाड़ियों पर शिकंजा कसने के लिए 'IT नियम 2021' में बड़े और सख्त बदलाव किए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी इन नए प्रावधानों ने साफ कर दिया है कि अब फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, गूगल और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म एडवाइजरी के नाम पर सरकारी आदेशों को नजरअंदाज नहीं कर पाएंगे।
क्या हैं नए नियम और कौन आएगा इसकी जद में?
नए नियमों के दायरे में हर वह डिजिटल प्लेटफॉर्म आएगा जो 'बिचौलिए' (Intermediary) की भूमिका निभाता है। इसमें शामिल हैं:
मैसेजिंग ऐप: व्हाट्सएप और टेलीग्राम।
सोशल मीडिया: फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (Twitter)।

वीडियो व सर्च: गूगल और यूट्यूब।
ई-कॉमर्स व ओटीटी: अमेज़न, फ्लिपकार्ट, नेटफ्लिक्स और प्राइम वीडियो।
डेटा सुरक्षा और सरकारी आदेश: अब बहानेबाजी नहीं चलेगी
अनिवार्य आदेश: पहले कंपनियां सरकार के निर्देशों को सलाह मानकर टाल देती थीं। अब मंत्रालय द्वारा जारी कोई भी SOP या गाइडलाइन मानना अनिवार्य होगा।

सेफ हार्बर सुरक्षा पर खतरा: यदि किसी कंपनी ने सरकारी आदेश का पालन नहीं किया तो उसे IT Act की धारा 79 के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा (Safe Harbour) छीन ली जाएगी। इसका मतलब है कि यूजर द्वारा पोस्ट किए गए किसी भी गलत कंटेंट के लिए अब कंपनी को भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
डेटा रिकॉर्ड: कंपनियों के लिए यूजर डेटा को सुरक्षित रखना और कानून के तहत मांगे जाने पर तय समय तक संभाल कर रखना अब कानूनी बाध्यता होगी।

न्यूज और फॉरवर्ड मैसेज पर पैनी नजर
नियम 8 में किए गए बदलाव के बाद अब सिर्फ न्यूज पब्लिशर्स ही नहीं बल्कि आम यूजर द्वारा शेयर की गई खबरें भी रडार पर होंगी। अगर आप व्हाट्सएप पर कोई फर्जी खबर फॉरवर्ड करते हैं या फेसबुक पर विवादित न्यूज शेयर करते हैं तो उस प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी तय होगी कि वह उसे तुरंत हटाए या कार्रवाई करे।
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शिकायत निवारण प्रणाली हुई मजबूत
सरकार ने एक पावरफुल कमेटी का गठन किया है जो नियमित रूप से 'कोड ऑफ एथिक्स' के उल्लंघन के मामलों की सुनवाई करेगी। यह कमेटी केवल शिकायतों को सुनेगी ही नहीं बल्कि सीधे मंत्रालय को कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भी कर सकेगी।

आम यूजर पर क्या होगा असर?
इन सख्त नियमों का सीधा मतलब है कि अब सोशल मीडिया पर आपकी पोस्ट और फॉरवर्ड किए गए मैसेज पर प्लेटफॉर्म की नजर पहले से कहीं ज्यादा सख्त होगी। 'फेक न्यूज' और 'हेट स्पीच' के मामलों में अब टेक कंपनियां तुरंत एक्शन लेंगी ताकि वे खुद कानूनी पचड़े से बच सकें।