Edited By Rohini Oberoi,Updated: 15 May, 2026 08:57 AM

अगर आप गूगल की फ्री सर्विस जैसे जीमेल (Gmail), गूगल ड्राइव (Google Drive) और गूगल फोटोज (Google Photos) का इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक गूगल ने अपनी स्टोरेज पॉलिसी में चुपचाप एक बड़ा बदलाव लागू करना शुरू...
Google Account Storage : अगर आप गूगल की फ्री सर्विस जैसे जीमेल (Gmail), गूगल ड्राइव (Google Drive) और गूगल फोटोज (Google Photos) का इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक गूगल ने अपनी स्टोरेज पॉलिसी में चुपचाप एक बड़ा बदलाव लागू करना शुरू कर दिया है। अब नए यूजर्स को पहले की तरह 15GB नहीं, बल्कि सिर्फ 5GB फ्री स्टोरेज दी जा रही है।
15GB स्टोरेज के लिए अब चुकाने होंगे इतने पैसे
रिपोर्ट्स के अनुसार अब फुल स्टोरेज (15GB) पाने के लिए यूजर्स को एक शर्त पूरी करनी होगी। एक यूजर को नया अकाउंट सेटअप करते समय नोटिफिकेशन मिला जिसमें साफ लिखा था कि अकाउंट में केवल 5GB स्टोरेज शामिल है। नोटिफिकेशन में बताया गया कि अगर यूजर अपना मोबाइल नंबर वेरिफाई करता है तभी उसे 15GB की पूरी लिमिट दी जाएगी। यानी अब बिना मोबाइल नंबर के गूगल की सेवाओं का भरपूर लाभ उठाना मुश्किल हो सकता है।

जानें क्या था पुराना नियम?
पिछले कई सालों से गूगल का यह नियम था कि नया अकाउंट बनाते ही यूजर को बिना किसी अतिरिक्त शर्त के 15GB क्लाउड स्टोरेज मुफ्त मिल जाती थी। एप्पल (iCloud) जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में गूगल की यह लिमिट काफी ज्यादा थी, जो इसकी लोकप्रियता की एक मुख्य वजह रही है। वहीं गूगल के इस फैसले को लेकर फिलहाल कुछ कंफ्यूजन भी बना हुआ है।

जीमेल पर अकाउंट बनाते समय अक्सर मोबाइल नंबर मांगा जाता है लेकिन कई बार इसे स्किप करने या पुरानी ईमेल आईडी डालने का विकल्प मिलता था। क्या अब यह विकल्प खत्म हो जाएगा? इस पर अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। 'एंड्रॉयड अथॉरिटी' की रिपोर्ट के मुताबिक जिनके पास एक से ज्यादा एक्टिव सिम कार्ड हैं वे अलग-अलग नंबरों से लॉगइन करके ज्यादा स्टोरेज हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं।
आम यूजर्स पर क्या पड़ेगा इसका असर?
आज के दौर में शायद ही कोई स्मार्टफोन यूजर हो जो गूगल की सर्विस का इस्तेमाल न करता हो। फोटो बैकअप से लेकर ऑफिस के डॉक्यूमेंट्स तक सब कुछ गूगल ड्राइव पर निर्भर है। ऐसे में स्टोरेज को 5GB तक सीमित करना उन लोगों के लिए झटका हो सकता है जो प्राइवेसी कारणों से अपना मोबाइल नंबर शेयर नहीं करना चाहते।