Stomach Cancer : इस वायरस से होता है पेट का कैंसर, जानें इससे बचने के तरीके

Edited By Updated: 12 Mar, 2026 07:07 PM

stomach cancer is caused by just one virus

दुनिया भर में बढ़ते पेट के कैंसर के मामलों के पीछे एक आम बैक्टीरिया बड़ा कारण बन सकता है। हाल ही में सामने आई एक रिसर्च के मुताबिक, पेट में पाया जाने वाला हेलिकोबैक्टर पाइलोरी नाम का बैक्टीरिया गैस्ट्रिक कैंसर के ज्यादातर मामलों से जुड़ा हो सकता है।...

नेशनल डेस्क : दुनिया भर में बढ़ते पेट के कैंसर के मामलों के पीछे एक आम बैक्टीरिया बड़ा कारण बन सकता है। हाल ही में सामने आई एक रिसर्च के मुताबिक, पेट में पाया जाने वाला हेलिकोबैक्टर पाइलोरी नाम का बैक्टीरिया गैस्ट्रिक कैंसर के ज्यादातर मामलों से जुड़ा हो सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बैक्टीरिया कई सालों तक शरीर में बिना किसी खास लक्षण के मौजूद रहता है, लेकिन समय के साथ यह गंभीर बीमारी की वजह बन सकता है।

रिसर्च में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

वैज्ञानिक जर्नल Nature Medicine में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, दुनिया में होने वाले करीब 76 प्रतिशत गैस्ट्रिक कैंसर के मामलों का संबंध हेलिकोबैक्टर पाइलोरी संक्रमण से हो सकता है। रिसर्चर्स का अनुमान है कि साल 2008 से 2017 के बीच जन्मी पीढ़ी में लगभग 1.6 करोड़ लोगों को जीवन के किसी न किसी चरण में पेट का कैंसर हो सकता है। इनमें से करीब 1.2 करोड़ मामले सीधे तौर पर इस बैक्टीरिया के संक्रमण से जुड़े हो सकते हैं। यह बैक्टीरिया पेट की भीतरी परत में रहता है और लंबे समय तक बिना किसी संकेत के सक्रिय रह सकता है। कई लोगों को इसका पता भी नहीं चलता, लेकिन कुछ मामलों में यह पेट के अल्सर और आगे चलकर कैंसर तक का कारण बन सकता है।

एशिया में सबसे ज्यादा खतरे की आशंका

एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में एशियाई देशों में इस बैक्टीरिया से जुड़े पेट के कैंसर के सबसे अधिक मामले सामने आ सकते हैं। अनुमान है कि अकेले एशिया में करीब 80 लाख केस देखने को मिल सकते हैं। वहीं उत्तर और दक्षिण अमेरिका को मिलाकर लगभग 15 लाख मामलों की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस संक्रमण की समय पर पहचान बेहद जरूरी है, क्योंकि इसे नियंत्रित कर कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

किन लोगों में ज्यादा रहता है जोखिम

कुछ खास परिस्थितियों में हेलिकोबैक्टर पाइलोरी संक्रमण का खतरा अधिक देखा जाता है। पूर्वी एशिया, पूर्वी यूरोप और दक्षिण अमेरिका के लोगों में यह समस्या ज्यादा पाई जाती है। इन क्षेत्रों से दूसरे देशों में गए लोगों में भी बचपन के संक्रमण की वजह से इसका असर देखने को मिल सकता है। इसके अलावा जिन लोगों के परिवार में पेट के कैंसर का इतिहास रहा हो, धूम्रपान करने वाले, मोटापे से पीड़ित व्यक्ति, ज्यादा नमक या प्रोसेस्ड फूड खाने वाले और 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में भी इसका खतरा ज्यादा माना जाता है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

कई बार यह संक्रमण लंबे समय तक बिना लक्षण के रहता है, लेकिन लगभग 30 प्रतिशत मामलों में इसके संकेत दिखाई दे सकते हैं। इनमें पेट में जलन या दर्द, थोड़ी मात्रा में खाना खाने पर ही पेट भरा महसूस होना, मतली, बार-बार डकार आना, अपच, पेट फूलना और बिना कारण वजन कम होना जैसे लक्षण शामिल हैं। अगर ये समस्याएं लंबे समय तक बनी रहें तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराना जरूरी होता है।

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