स्वाति मालीवाल केस : केजरीवाल के पीए विभव कुमार को SC से बड़ी राहत, 100 दिन बाद मिली जमानत

Edited By Updated: 03 Sep, 2024 07:38 AM

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राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट के मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पीए, विभव कुमार को सुप्रीम कोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने विभव कुमार को जमानत दे दी है, जिससे 100 दिन बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ...

नई दिल्ली : राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट के मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पीए, विभव कुमार को सुप्रीम कोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने विभव कुमार को जमानत दे दी है, जिससे 100 दिन बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। विभव कुमार को इस मामले में 18 मई को गिरफ्तार किया गया था। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने उन्हें जमानत प्रदान की, हालांकि दिल्ली पुलिस ने इस निर्णय का कड़ा विरोध किया था।

कोर्ट ने मामले की जांच पूरी हो चुकी है
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। अभी भी 51 से अधिक गवाहों की गवाही बाकी है और ट्रायल पूरा होने में समय लगेगा। विभव कुमार 100 दिनों से अधिक समय से हिरासत में हैं, लेकिन चूंकि जांच पहले ही पूरी हो चुकी है, वह अब जांच में कोई बाधा उत्पन्न नहीं कर सकते। हालांकि, पुलिस ने गवाहों को प्रभावित करने की आशंका जताई है। यदि ऐसा साबित होता है कि गवाहों को प्रभावित किया गया है, तो जमानत की सुविधा वापस ली जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वे यह देखने के इच्छुक नहीं हैं कि मामला प्रथम दृष्टया अपराध की श्रेणी में आता है या नहीं, क्योंकि यह ट्रायल कोर्ट की विशेष जिम्मेदारी है।

किसी सरकारी पद पर नियुक्त नहीं होंगे PA विभव
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देशित किया कि ट्रायल पूरा होने तक विभव कुमार को कुछ शर्तों के साथ अंतरिम जमानत दी जाएगी। इन्हीं शर्तों के तहत, विभव को मालीवाल के घर या घटनास्थल पर जाने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, विभव को मुख्यमंत्री के आवास या कार्यालय में भी नहीं जाने दिया जाएगा और उन्हें इस मामले के बारे में कोई सार्वजनिक बयान देने की अनुमति नहीं होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि विभव कुमार को किसी सरकारी पद पर नियुक्त नहीं किया जाएगा और आम आदमी पार्टी को इस केस के मेरिट पर कोई टिप्पणी करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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