Edited By Pardeep,Updated: 22 Aug, 2026 03:53 AM

दिल्ली में उमस भरे और बदलते मौसम के बीच H1N1 (स्वाइन फ्लू) के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। संक्रमण का असर इस कदर बढ़ गया है कि आम लोगों के साथ-साथ कई डॉक्टर भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। अस्पतालों में लगातार फ्लू जैसे लक्षणों और सांस...
नई दिल्ली: दिल्ली में उमस भरे और बदलते मौसम के बीच H1N1 (स्वाइन फ्लू) के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। संक्रमण का असर इस कदर बढ़ गया है कि आम लोगों के साथ-साथ कई डॉक्टर भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। अस्पतालों में लगातार फ्लू जैसे लक्षणों और सांस की गंभीर बीमारियों वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जिसमें कुछ मरीजों में ऑक्सीजन का स्तर कम होने की चिंताजनक शिकायतें भी मिल रही हैं।
तीन दिन के भीतर दो सगी बहनों ने तोड़ा दम
हाल ही में एक निजी अस्पताल में तीन दिन के भीतर दो सगी बहनों की मौत का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया था। तीन साल 11 महीने की छोटी बहन को गंभीर हालत में तीन अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां जांच में उसे H1N1 संक्रमण होने की पुष्टि हुई। एमआरआई (MRI) जांच के दौरान बच्ची के मस्तिष्क में 'एक्यूट नेक्रोटाइजिंग एन्सेफैलोपैथी' (ANEC) के संकेत मिले, जो फ्लू संक्रमण के बाद बहुत ही दुर्लभ मामलों में होने वाला एक गंभीर दिमागी प्रभाव है। डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद पांच अगस्त की सुबह 5:10 बजे बच्ची की मौत हो गई थी।
परिवार के अनुसार, मृत बच्ची की बड़ी बहन की मौत भी इससे ठीक तीन दिन पहले हुई थी। उसमें भी तेज बुखार, सर्दी और जुकाम जैसे लक्षण देखे गए थे, हालांकि बड़ी बहन में जांच न होने के कारण H1N1 संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी।
मरीजों में बच्चों की संख्या सबसे अधिक, पिछले साल से कई गुना बढ़े मामले
आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति बेहद चिंताजनक है। पिछले वर्ष जहां पूरे साल में H1N1 के केवल 229 मामले सामने आए थे, वहीं इस वर्ष अब तक संक्रमण का आंकड़ा 1700 के पार पहुंच चुका है। लगातार हो रही बारिश, वातावरण में अत्यधिक नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण अस्पतालों की ओपीडी में बुखार, खांसी, गले में खराश और सांस की तकलीफ वाले मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिनमें बच्चों की संख्या सबसे अधिक है।
चिकित्सकों ने स्पष्ट किया है कि H1N1 कोई मच्छर जनित बीमारी नहीं है। यह इन्फ्लूएंजा 'ए' वायरस से होने वाला एक सांस का संक्रमण है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या उसके संपर्क में आने से एक से दूसरे मनुष्य में फैलता है।
H1N1 से इन लोगों को खतरा
बुजुर्गों, छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को H1N1 से गंभीर बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है। डायबिटीज, दिल या फेफड़ों की पुरानी बीमारी और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
बचाव और सुरक्षा के लिए डॉक्टरों की विशेष सलाह:
इलाज की बात करें तो ज्यादा जोखिम वाले और गंभीर मरीजों में डॉक्टर एंटीवायरल दवा ओसेल्टामिविर दे सकते हैं। यह बीमारी की शुरुआत के 48 घंटे के भीतर शुरू होने पर सबसे ज्यादा असरदार मानी जाती है। H1N1 में एंटीबायोटिक आमतौर पर जरूरी नहीं होती, जब तक बैक्टीरियल इंफेक्शन न हो।
- मास्क और रूमाल का प्रयोग: खांसते या छींकते समय अपने मुंह और नाक को रूमाल या मास्क से जरूर ढकें।
- हाथों की स्वच्छता: हाथों को बार-बार साबुन और पानी से धोएं। बिना हाथ धोए अपनी आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
- दूरी बनाएं: बुखार, खांसी या गले में खराश होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों और स्कूलों में जाने से परहेज करें।
- हवादार कमरे: अपने घर और कक्षाओं में हवा का सुचारू आवागमन (वेंटीलेशन) बनाए रखें।
- खुद से दवा न लें: H1N1 एक वायरल संक्रमण है, इसलिए खुद से कोई भी एंटीबायोटिक दवा न लें। डॉक्टर की सलाह पर ही एंटी-वायरल दवाएं लें।
- टीकाकरण: फ्लू से बचाव के लिए उपलब्ध इन्फ्लूएंजा का टीका जरूर लगवाएं।
- इन लक्षणों पर तुरंत जाएं अस्पताल: यदि मरीज को तेज बुखार के साथ सांस लेने में अत्यधिक परेशानी हो, बहुत सुस्ती लगे, सीने में दर्द हो या होंठ नीले पड़ने लगें, तो बिना देरी किए तुरंत अस्पताल ले जाएं।