दिल्ली में रोजाना 15 हजार टन कचरा पैदा होता है, निस्तारण क्षमता बढ़ाने पर जोर : रेखा गुप्ता

Edited By Updated: 17 Oct, 2026 09:17 PM

15 000 tonnes of waste is generated daily in delhi emphasis needed on increasin

दिल्ली में रोजाना करीब 15,000 मीट्रिक टन कचरा पैदा होता है, लेकिन इसमें से केवल 6,000 से 7,000 मीट्रिक टन कचरे का ही निस्तारण हो पाता था, जिसे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को सरिता विहार में कचरा स्थानांतरण...

नेशनल डेस्क : दिल्ली में रोजाना करीब 15,000 मीट्रिक टन कचरा पैदा होता है, लेकिन इसमें से केवल 6,000 से 7,000 मीट्रिक टन कचरे का ही निस्तारण हो पाता था, जिसे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को सरिता विहार में कचरा स्थानांतरण केंद्र का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। उन्होंने दिल्ली में कचरा उठाने वाली 1,000 मशीनें तैनात करने के अभियान की भी शुरुआत की।

दिल्ली सरकार की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, ये मशीनें दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के सभी 250 वार्ड में तैनात की जाएंगी। पहले चरण में 50 मशीनों को रवाना किया गया। सरकार ने घरों से कचरा एकत्र करने और उसके परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों को चलाने के लिए 35 महिला चालकों को भी नियुक्त किया है। गुप्ता ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कचरा प्रबंधन राष्ट्रीय राजधानी के लिए एक बड़ी चुनौती है और सरकार इस समस्या के समाधान के लिए दीर्घकालिक योजना पर काम कर रही है। उन्होंने कहा, ''कचरा प्रबंधन हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार अगले 15 से 30 वर्षों के लिए दीर्घकालिक योजना पर काम कर रही है।''

मुख्यमंत्री ने कहा कि रोजाना पैदा होने वाले कचरे और उसके निस्तारण की मात्रा के बीच अंतर के कारण शहर में कूड़े के पहाड़ बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि सरकार कचरे से बिजली बनाने वाले नए संयंत्र स्थापित करने, मौजूदा संयंत्रों की क्षमता बढ़ाने, ई-कचरा केंद्र बनाने और गोबर के निस्तारण के लिए बायोगैस संयंत्र लगाने की दिशा में काम कर रही है। गुप्ता ने कहा कि सरकार सफाई व्यवस्था मजबूत करने के लिए एमसीडी को मशीनें, उपकरण और धन उपलब्ध करा रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर दिन पैदा होने वाले कचरे का उसी दिन प्रसंस्करण और निस्तारण हो सके। दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में घरों से कचरा एकत्र करने के लिए 428 ऑटो-टिपर, 128 ई-रिक्शा और 25 टाटा 407 वाहन उपलब्ध कराने की मंजूरी दी गई है।

इसके अलावा, कचरा दबाने वाली 27 मशीनों को भी मंजूरी दी गई है। सरकार ने स्टील के 1,500 कूड़ेदान, उच्च घनत्व वाले पॉलीथीन (एचडीपीई) के 300 कूड़ेदान और बागवानी से निकलने वाले कचरे के परिवहन के लिए 10 टिपर ट्रक भी उपलब्ध कराए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, एमसीडी के लिए प्रस्तावित कचरा उठाने वाली बैटरी चालित 1,000 मशीनों में से 150 आ चुकी हैं। बाकी मशीनों की आपूर्ति अगले महीने के भीतर होने की उम्मीद है। ये मशीनें सड़कों और सार्वजनिक स्थानों से कचरे के छोटे-छोटे टुकड़े उठाने और सफाई अभियान में मदद करेंगी।

गुप्ता ने लोगों से अपील की कि वे पुराने कपड़ों और धार्मिक सामग्री को सामान्य कचरे में फेंकने के बजाय उनके संग्रह के लिए निर्धारित केंद्रों का इस्तेमाल करें। सरकार ने पुराने कपड़ों को दोबारा इस्तेमाल और पुनर्चक्रण के लिए एकत्र करने के वास्ते मेट्रो स्टेशन के पास 'अर्पण' केंद्र स्थापित किए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि एमसीडी के सभी 250 वार्ड में खंडित मूर्तियों और पूजा सामग्री को अलग से एकत्र करने के लिए विसर्जन केंद्र बनाने की भी योजना है। उनके अनुसार, ऐसे करीब 100 केंद्र पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं।

इस पहल का उद्देश्य धार्मिक सामग्री को सामान्य कचरे में मिलने से रोकना और उसका अलग से संग्रह तथा प्रसंस्करण सुनिश्चित करना है। दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही ने कहा कि एमसीडी ठोस कचरा प्रबंधन में सुधार के लिए काम कर रही है। उन्होंने लोगों से गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने, निर्धारित व्यवस्था के तहत घरेलू कचरा सौंपने और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी नहीं फैलाने की अपील की। 

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