Edited By Radhika,Updated: 09 Jul, 2026 05:49 PM

UK में सिख समुदाय द्वारा धारण की जाने वाली 'कृपाण' पर प्रतिबंध लगाने के संभावित प्रस्तावों को लेकर भारत में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए ब्रिटेन सरकार से इस तरह के किसी भी...
नेशनल डेस्क: UK में सिख समुदाय द्वारा धारण की जाने वाली 'कृपाण' पर प्रतिबंध लगाने के संभावित प्रस्तावों को लेकर भारत में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए ब्रिटेन सरकार से इस तरह के किसी भी प्रस्ताव को तुरंत खारिज करने की मांग की है। सिंह ने स्पष्ट किया है कि किसी एक व्यक्ति के गलत कृत्य के कारण पूरे सिख समुदाय और उसकी पवित्र धार्मिक परंपराओं को कटघरे में खड़ा नहीं किया जा सकता।
कृपाण हमला करने का हथियार नहीं, आस्था का प्रतीक है
भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए अपनी बात कही है। उन्होंने कहा कि कृपाण कोई हमला करने वाला हथियार नहीं है, बल्कि यह सिखों की आस्था का एक बेहद पवित्र हिस्सा है। उन्होंने कहा कि कृपाण उन पांच 'ककारों' (पंच ककार) में से एक है, जिन्हें साल 1699 में दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना के समय सिखों को सौंपा था। यह पवित्र वस्तु न्याय, साहस, आत्म-रक्षा, कमजोरों की रक्षा और अत्याचार के खिलाफ डटकर खड़े होने के मानवीय कर्तव्य का प्रतीक है।
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ब्रिटेन सरकार को नसीहत देते हुए कहा-
ब्रिटेन सरकार को नसीहत देते हुए भाजपा नेता ने कहा कि दुनिया भर में लाखों सिख कानून का पूरी तरह पालन करते हुए रहते हैं। यदि कोई व्यक्तिगत स्तर पर अपराध करता है, तो उसे कानून के तहत सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए, लेकिन उसकी आड़ में पूरे धर्म को अपराधी नहीं ठहराया जा सकता। आरपी सिंह ने चेतावनी दी कि कृपाण पर प्रतिबंध लगाने का कोई भी कदम दुनिया भर के सिख समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँचाएगा। यह कदम एक लोकतांत्रिक और विविधतापूर्ण समाज में धार्मिक स्वतंत्रता के बुनियादी मूल्यों के खिलाफ गलत संदेश देगा।
भारत सरकार से राजनयिक हस्तक्षेप की मांग
भाजपा प्रवक्ता ने यूके सरकार से अपील की है कि वे इस संवेदनशील विषय पर सिख संगठनों के साथ मिलकर सकारात्मक बातचीत का रास्ता चुनें, ताकि सार्वजनिक सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके और सिखों के मानवाधिकारों व धार्मिक स्वतंत्रता का भी सम्मान बना रहे। इसके साथ ही उन्होंने भारत सरकार से भी आग्रह किया है कि वह उचित राजनयिक माध्यमों (Diplomatic Channels) का उपयोग करते हुए यूके के अधिकारियों के साथ इस मुद्दे को उठाए, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कृपाण के पवित्र महत्व को सही ढंग से समझा और उसका सम्मान किया जा सके। उन्होंने अपने संदेश के अंत में जोर देकर कहा "आस्था की रक्षा करें, अपराध को दंडित करें। दोनों को कभी एक साथ न मिलाएँ।"